जनवरी-फरवरी 2026 में अमित शाह की लगातार बंगाल विजिट्स हुईं। 31 जनवरी और 1 फरवरी को उत्तर 24 परगना और बागडोगरा में कार्यकर्ता सम्मेलनों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “बंगाल में बीजेपी की सरकार बनेगी।” उन्होंने TMC सरकार पर भ्रष्टाचार, घुसपैठ और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोप लगाए।
बीजेपी की चुनौती क्यों बड़ी?
2014 से बीजेपी बंगाल पर फोकस कर रही है। 2019 लोकसभा में 18 सीटें जीतीं, लेकिन 2021 विधानसभा में सिर्फ 77 सीटें मिलीं। 2024 लोकसभा में और झटका लगा – TMC ने 29 सीटें जीतीं, जबकि BJP सिर्फ 12 पर सिमट गई। ममता बनर्जी का गढ़ अब भी अभेद्य है। TMC मुस्लिम वोट बैंक, महिला कल्याण योजनाओं और बंगाली अस्मिता पर मजबूत पकड़ बनाये हुए है।
बीजेपी की रणनीति: मतुआ-नामशूद्र समुदाय, घुसपैठ विरोध और केंद्र की योजनाओं को हथियार बनाना। शाह ने मतुआ समुदाय को CAA का फायदा दिलाने का वादा किया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 2026 में बीजेपी स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाएगी।
TMC का जवाब और नई लड़ाई
ममता बनर्जी ने SIR (वोटर लिस्ट रिवीजन) को “वोटर डिलीशन” बताकर चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। TMC ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की धमकी दी है। कांग्रेस अलग लड़ेगी, जिससे विपक्षी वोट बंट सकता है। मुस्लिम वोटों पर नई अलाइंस की कोशिशें चल रही हैं। 2026 का चुनाव अप्रैल-मई में होना है। बीजेपी के लिए यह “नाक की लड़ाई” है, जबकि TMC इसे अपनी साख का सवाल बता रही है। बंगाल की सियासत में अगले कुछ महीने तूफानी रहने वाले हैं।

