बॉटनिकल गार्डन 2 साल तक बंद: नोएडा के सेक्टर-38ए स्थित प्रसिद्ध बॉटनिकल गार्डन ऑफ इंडियन रिपब्लिक अब आम जनता के लिए पूरी तरह बंद हो गया है। गार्डन को विश्व स्तरीय पर्यटन और पर्यावरण केंद्र बनाने के लिए 490 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना शुरू की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, पुनर्विकास कार्य पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे, इसलिए इस दौरान गार्डन में किसी भी आगंतुक को एंट्री नहीं मिलेगी।
गार्डन के वैज्ञानिक प्रभारी संदीप चौहान ने बताया कि जनवरी 2025 से ही विजिटर्स की एंट्री बंद कर दी गई थी और अब इसे पूरी तरह से नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। काम में कोई बाधा न हो, इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर गेटों पर सख्ती से नो एंट्री बोर्ड लगाए गए हैं।
गार्डन का नया रूप
पुनर्विकास के तहत गार्डन में कई आकर्षक थीम आधारित जोन बनाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- ट्रेलिस गार्डन
- डिस्कवरी गार्डन
- बोन्साई सेक्शन
- क्यूरियस प्लांट सेक्शन
- गार्डन ऑफ सेंसिस
- एक्वाटिक गार्डन
इसके अलावा कैक्टस, सक्युलेंट्स, पाम्स और जंगली खाद्य पौधों के लिए अलग-अलग विशेष क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन बदलावों के बाद गार्डन का लुक पूरी तरह बदल जाएगा और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा।
एलिवेटेड रोड सर्वे से जुड़ी खबर
रिपोर्ट में गार्डन बंद होने को एलिवेटेड रोड सर्वे से भी जोड़ा गया है। नोएडा अथॉरिटी शहर के ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए सेक्टर-3 से सेक्टर-57 तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को फिर से गति दे रही है। इस रूट पर कई सिग्नल (रजनीगंधा चौक, सेक्टर-10, 21, चौड़ा मोड़ आदि) पर रोजाना भारी जाम लगता है। नोएडा अथॉरिटी ने आईआईटी को दोबारा सर्वे करने के लिए पत्र लिखा है। आईआईटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही तय होगी।
हालांकि, गार्डन बंद होने का मुख्य कारण इसका अपना पुनर्विकास कार्य है। एलिवेटेड रोड परियोजना इससे अलग है, लेकिन दोनों परियोजनाएं नोएडा की कनेक्टिविटी और सुंदरता को बेहतर बनाने का हिस्सा हैं। नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि दो साल बाद जब गार्डन फिर से खुला तो यह नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक बड़ा पर्यटन आकर्षण बनेगा। इस दौरान स्थानीय लोगों और पर्यटकों को वैकल्पिक गार्डन या पार्कों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद गार्डन न केवल हरा-भरा रहेगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं, दुर्लभ पौधों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा।

