पृष्ठभूमि: दिल्ली सरकार ने अगस्त 2024 में पारित दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीज) एक्ट, 2025 को दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया था। इसका उद्देश्य निजी स्कूलों में फीस निर्धारण में पारदर्शिता लाना और मनमानी बढ़ोतरी रोकना है। कानून के तहत हर स्कूल में 10 सदस्यीय स्कूल लेवल फी रेगुलेशन कमिटी (एसएलएफआरसी) गठित की जानी है, जिसमें प्रिंसिपल (सचिव), स्कूल प्रबंधन का एक प्रतिनिधि (अध्यक्ष), 5 अभिभावक, 3 शिक्षक (लॉटरी से चुने गए) और शिक्षा निदेशालय (डीओई) का एक नामिती शामिल होगा। यह समिति 2025-26 सत्र के लिए फीस प्रस्तावों की समीक्षा करेगी।
निजी स्कूलों के संगठनों जैसे एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स और अन्य ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका मुख्य तर्क है कि यह कानून स्कूलों की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है, 1973 के दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट से विरोधाभासी है और अभिभावकों को अनुचित रूप से अधिक अधिकार देता है। स्कूलों का कहना है कि फीस निर्धारण में प्रबंधन का अधिकार छीना जा रहा है, जो सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों (जैसे टीएमए पाई फाउंडेशन केस) के खिलाफ है।
ताजा फैसला: कोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 की डीओई अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे 2025-26 सत्र के लिए समितियां गठित करने का निर्देश लागू रहेगा। कोर्ट ने इसे “एक बार का उपाय” बताते हुए कहा कि इससे फीस निर्धारण में निष्पक्षता आएगी। हालांकि, स्कूलों की सुविधा को देखते हुए:
• समिति गठन की समयसीमा 10 जनवरी से बढ़ाकर 20 जनवरी कर दी गई।
• फीस प्रस्ताव जमा करने की तारीख 25 जनवरी से बढ़ाकर 5 फरवरी कर दी गई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना के तहत की जाने वाली कोई भी कार्रवाई आगे के आदेशों के अधीन होगी। सात याचिकाओं को एक साथ जोड़ा गया है और केंद्र सरकार, उपराज्यपाल तथा डीओई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को होगी।
स्कूलों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया: निजी स्कूलों ने इसे अपनी स्वायत्तता पर हमला बताया है, जबकि अभिभावक संगठनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से फीस वृद्धि में पारदर्शिता की कमी थी और यह कानून अभिभावकों के हित में है।
यह मामला दिल्ली के सैकड़ों निजी स्कूलों और लाखों अभिभावकों को प्रभावित कर रहा है। कानून की वैधता पर अंतिम फैसला आने तक 2025-26 सत्र की फीस वृद्धि इसी नए ढांचे के तहत तय होगी।

