पुलिस और जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विपिन यादव SIR ड्यूटी के कारण भारी काम के बोझ तले दबे हुए थे। SIR के तहत BLOs को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का जिम्मा सौंपा गया है, जिसमें घर-घर जाकर फॉर्म भरवाना, पुरानी मतदाता सूचियों से मिलान करना और ऑनलाइन अपलोडिंग जैसे जटिल कार्य शामिल हैं। विपिन ने कथित तौर पर सहकर्मियों को बताया था कि वे इस दबाव को झेल नहीं पा रहे। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी जिक्र है कि स्थानीय लोगों द्वारा उकसावे की बात सामने आई है, जबकि परिवार ने पत्नी की संदिग्ध भूमिका का भी इशारा किया है। हालांकि, पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
यह अकेली घटना नहीं है। पिछले 19 दिनों में छह राज्यों में कम से कम 15 BLOs की मौत हो चुकी है, जिनमें आत्महत्या, हार्ट अटैक और हादसे शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में दो BLOs—रिंकी तारफदार और एक अन्य—ने SIR के दबाव में आत्महत्या की, जहां सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया गया। गुजरात में कल्पनाबेन पटेल और अरविंद वाधेर जैसी घटनाएं हुईं, जबकि केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भी BLOs ने दबाव के चलते जान दे दी। एक BLO ने गुजरात के गोधरा से लाइव वीडियो में आत्महत्या की धमकी दी, जिसमें उन्होंने 200 फॉर्म भरने के टारगेट को पूरा न करने पर सख्ती का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। पत्रकार ने एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “लोगों को BLOs से शिकायत है कि वो अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं कर रहे, लेकिन BLOs खुद काम के प्रेशर में आत्महत्या कर रहे हैं।” इसी तरह, अन्य यूजर्स ने SIR को ‘वोट चोरी का खेल’ बताते हुए BLOs पर डाले जा रहे बोझ की आलोचना की। एक पोस्ट में लिखा गया, “SIR के दबाव में BLO आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन आम आदमी कह रहा है कि BLO हम जिंदा लोगों को ही मृत घोषित कर नाम काट रहे हैं।”
चुनाव आयोग (ECI) पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दल TMC और अन्य ने SIR प्रक्रिया को ‘अस्पष्ट और जल्दबाजी भरा’ बताते हुए BLOs की भर्ती और ट्रेनिंग में खामियां गिनाईं। ECI ने कुछ राज्यों में सहायकों की व्यवस्था की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 30 दिनों में पूरे देश की मतदाता सूची संशोधन असंभव है। BLOs, जो ज्यादातर शिक्षक या अंशकालिक कर्मचारी हैं, को तकनीकी कार्यों के लिए तैयार नहीं किया गया।
केरल में एक BLO को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मनाया गया, लेकिन गोंडा जैसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
विपिन यादव के परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। जिला मजिस्ट्रेट ने जांच टीम गठित की है और कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह घटना न केवल BLOs की दुर्दशा उजागर कर रही है, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ माने जाने वाले मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में सुधार की मांग को तेज कर रही है। क्या ECI इस दर्द को सुन पाएगी? सवाल वही है—काम का बोझ कम होगा या BLOs की संख्या घटेगी?

