Big Win For Kejriwal- Sisodia: दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल- सिसोदिया को कोर्ट से क्लीन चिट, साजिश का आरोप खारिज, राजनीतिक साजिश या न्याय की जीत?

Big Win For Kejriwal- Sisodia: आज राउज एवेन्यू कोर्ट (स्पेशल जज जितेंद्र सिंह) ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी (शराब नीति) घोटाले के सीबीआई मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों (कुल 23) को डिस्चार्ज कर दिया। कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया और साफ कहा- “नीति में कोई overarching criminal conspiracy या criminal intent नहीं था। केजरीवाल के खिलाफ cogent evidence नहीं, सिसोदिया और बाकी के खिलाफ prima facie case भी नहीं। चार्जशीट में आंतरिक contradictions हैं, जो conspiracy theory की जड़ पर हमला करती हैं।” कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए और कहा कि आरोप judicial scrutiny में खरे नहीं उतरे। जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया। सीबीआई ने फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का ऐलान किया है।

केजरीवाल भावुक, बोले- ‘मैं कट्टर ईमानदार हूं’
फैसले के बाद केजरीवाल भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, “मैं भ्रष्ट नहीं हूं। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ईमानदार हैं। AAP ईमानदार है। बीते सालों में BJP ने हमारे ऊपर कीचड़ उछाला, लेकिन आज सत्य की जीत हुई। यह स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश थी।” सिसोदिया ने भी कहा, “सत्य की जीत हुई। मोदी जी की पूरी पार्टी और एजेंसियों के बावजूद हमें ईमानदार साबित किया गया।” AAP ने बयान जारी कर कहा- “सत्य अमर है, BJP की झूठी कहानी पर हमेशा के लिए ताला लग गया।”

BJP का पलटवार: ‘निचली अदालत का फैसला, अपील होगी’
BJP ने फैसले को ‘तकनीकी’ बताते हुए सवाल किया- “अगर कोई केस ही नहीं तो चार्ज कैसे फ्रेम हुए?” BJP सांसद सुदांशु त्रिवेदी ने कहा, “निचली अदालत ने सबूत न होने पर बरी किया, लेकिन अगर आरोप बेबुनियाद थे तो पहले फ्रेम क्यों किए गए? अगर ईमानदार थे तो शराब नीति वापस क्यों ली?” BJP IT सेल चीफ अमित मालवीय ने X पर लिखा- “निचली अदालत का फैसला, हायर कोर्ट में क्या टिकेगा, देखना बाकी। कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई।”

विपक्ष का हमला: BJP की ‘पार्टी तोड़ने’ की नीति?
कांग्रेस, RJD, DMK समेत कई विपक्षी दलों ने इसे BJP की राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “यह BJP का playbook है- vendetta as governance, agencies as campaign tools।” RJD के मनोज झा ने इसे “vendetta without merit” करार दिया। तमिलनाडु CM एमके स्टालिन ने BJP पर तंज कसा- “BJP ने राजनीति के लिए एजेंसियों की साख बेच दी, शर्म करो।” कई X पोस्ट्स और आम जनता ने कहा- “शक्तिशाली लोगों को 5-17 महीने जेल में रखा, फिर क्लीन चिट… आम आदमी की क्या हालत होगी?”

क्यों जेल गए जब सबूत कम थे?
2022 में LG विनय सक्सेना की शिकायत पर CBI-ED ने जांच शुरू की। आरोप था कि AAP ने 2021-22 शराब नीति में जानबूझकर loopholes छोड़े ताकि कुछ लाइसेंसधारियों को फायदा पहुंचे और रिश्वत ली जाए (साउथ लॉबी से)। सिसोदिया को फरवरी 2023 में गिरफ्तार किया गया (17 महीने जेल), केजरीवाल को मार्च 2024 में (लोकसभा चुनाव से पहले, करीब 5 महीने)। SC ने 2024 में दोनों को बेल दी और prolonged incarceration पर सवाल उठाए। लेकिन आज कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट में recovery, document या witness के अभाव में आरोप टिक नहीं सके। विपक्ष इसे “arrest first, evidence later” और BJP की ‘पार्टी तोड़ने’ वाली रणनीति (जैसे अन्य विपक्षी नेताओं पर ED-CBI केस) मानता है। BJP इसे “rule of law” कहती है।

मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
देशी मीडिया ने फैसले को AAP के लिए बड़ा झटका BJP को और CBI-ED की छवि पर सवाल बताया। कई रिपोर्ट्स में कोर्ट की CBI आलोचना हाइलाइट की गई। सोशल मीडिया (X) पर #KejriwalCleanChit ट्रेंड कर रहा है- लोग सत्य की जीत मना रहे हैं, BJP पर vendetta का आरोप लगा रहे हैं, साथ ही पूछ रहे हैं कि मोदी जी माफी मांगेंगे या नहीं। कुछ यूजर्स ने कहा, “Godi media ने conviction साबित कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने नहीं।” विदेशी मीडिया (BBC, Reuters आदि) में अभी विस्तृत कवरेज नहीं आया है (घटना आज की), लेकिन पहले गिरफ्तारी पर opposition ने इसे political targeting बताया था और Amnesty International जैसी संस्थाओं ने laws के misuse पर चिंता जताई थी।

मामला क्या है- vendetta या कुछ और?
AAP और विपक्ष इसे BJP की विपक्ष तोड़ने की नीति का हिस्सा मानते हैं (जेल भेजकर चुनाव प्रभावित करना)। BJP कहती है कि जांच स्वतंत्र थी, अब अपील में सबूत पेश होंगे। कोर्ट ने आज साबित किया कि शुरुआती सबूत पर्याप्त नहीं थे, लेकिन कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। यह फैसला दिल्ली राजनीति को नया मोड़ दे सकता है, खासकर AAP की छवि को बूस्ट मिलेगा। सत्य की जीत जरूर, लेकिन न्याय व्यवस्था पर सवाल भी उठे रहे हैं- शक्तिशाली तो बेल/क्लीन चिट पा जाते हैं, लेकिन आम आदमी क्या?

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