नोएडा-ग्रेटर नोएडा के आवंटियों को बड़ी राहत: आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के लिए योगी सरकार ने तेज की प्रक्रिया

लखनऊ/नोएडा: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के वर्षों से लंबित कानूनी विवादों को सुलझाने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन स्तर पर एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट’ (न्यायालय के बाहर समाधान) के माध्यम से उन आवंटियों को राहत देना है जो लंबे समय से कानूनी दांव-पेच में फंसे हुए हैं। इस तरह के मामलों से प्राधिकरण के लॉ डिपार्टमेंट पर भार तो पड़ ही रहा है, साथ ही प्राधिकरणों का कानूनी प्रक्रिया में धन भी खर्च हो रहा है। जिसे देखते हुए योगी सरकार का सराहनीय कदम है जिस तरह से लोक अदालत में मामले निस्तारित किए जा रहे हैं। ठीक उसी तरह से यूपी सरकार भी प्राधिकरणों और शासन से संबंधित कोर्ट के मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित कराना चहाती ताकि लोगो का समय बर्बाद ना हो।

IDC दीपक कुमार को सौंपी गई कमान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निवेश और विकास की राह में रोड़ा बन रहे कोर्ट मामलों को आपसी सहमति से निपटाया जाए। इस जिम्मेदारी का नेतृत्व औद्योगिक विकास आयुक्त (IDC) दीपक कुमार कर रहे हैं। शासन स्तर पर गठित समिति उन आवेदनों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने प्राधिकरण की सेटलमेंट पॉलिसी के तहत अपनी सहमति दी है।

किन मामलों को मिलेगी प्राथमिकता?

प्राधिकरण के सूत्रों और शासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान निम्नलिखित मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • नीतिगत सहमत आवेदक: जिन आवंटियों या बिल्डरों ने प्राधिकरण की मौजूदा नीतियों (जैसे अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें या अन्य ओटीएस योजनाएं) के तहत कोर्ट से केस वापस लेकर आपसी समझौते की अर्जी दी है।
  • अटकी हुई परियोजनाएं: वे मामले जिनके सुलझने से हजारों फ्लैट खरीदारों को उनके घर का पजेशन मिल सकता है।
  • भूमि विवाद: किसानों और प्राधिकरण के बीच मुआवजे या विकसित भूखंड (5% या 7% आबादी प्लॉट) को लेकर चल रहे वे विवाद जो दशकों से लंबित हैं।

इस पहल के मुख्य लाभ

  1. समय की बचत: सालों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बजाय कुछ ही महीनों में मामलों का निस्तारण संभव होगा।
  2. आर्थिक गति: विवाद सुलझने से रुकी हुई परियोजनाओं में निर्माण कार्य फिर से शुरू होगा, जिससे रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।
  3. निवेशकों का भरोसा: शासन की इस सक्रियता से निवेशकों और घर खरीदारों के बीच यह संदेश जा रहा है कि सरकार समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है।

महत्वपूर्ण नोट: शासन स्तर पर चल रही इन सुनवाइयों में प्राधिकरण के सीईओ और कानूनी विशेषज्ञों की टीम भी शामिल हो रही है, ताकि समझौते की शर्तें कानूनी रूप से पुख्ता हों और भविष्य में दोबारा विवाद की स्थिति न बने।

भविष्य की राह

प्राधिकरणों का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों के भीतर कम से कम 30% से 40% लंबित मामलों को आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के माध्यम से समाप्त कर दिया जाए। इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की छवि एक ‘विवाद मुक्त’ निवेश हब के रूप में उभरेगी।

 

 यह भी पढ़ें: महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक को किया गया सम्मानित 

यहां से शेयर करें