Bicycle accidents are on the rise across the country: दिल्ली-एनसीआर और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चिंता का माहौल, सरकार ने उठाए ठोस कदम

Bicycle accidents are on the rise across the country: देशभर में दोपहिया वाहनों (बाइक) की दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मोटरसाइकिल सवारों की मौतें कुल सड़क दुर्घटना मौतों का करीब 45% हिस्सा हैं, जबकि हर घंटे औसतन 9 बाइक सवारों की जान जा रही है। दिल्ली में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,617 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले 7 वर्षों का सबसे उच्च आंकड़ा है। दुर्घटनाओं में 4% की बढ़ोतरी हुई है। खासकर दिल्ली-एनसीआर और ग्रेटर नोएडा वेस्ट (ग्रेनो वेस्ट) में स्थिति गंभीर है, जहां निर्माणाधीन सड़कें, खुली खाइयां, रैश ड्राइविंग और आवारा पशु बड़ी वजह बन रहे हैं।

दुर्घटनाओं के मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों और पुलिस रिपोर्ट्स के मुताबिक, अत्यधिक गति, गलत साइड ड्राइविंग, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट न पहनना और ट्रिपल राइडिंग प्रमुख कारण हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हाल ही में कई दर्दनाक घटनाएं हुईं—थार जैसी गाड़ियों ने बाइक को किलोमीटरों तक घसीटा, निर्माणाधीन अंडरपास में डुकाती बाइक गिरकर युवक-युवती की मौत हुई, टैंकर से टकराकर तीन कॉलेज छात्र मारे गए और कई बार खुली खाइयों में बाइक गिरने से जानें गईं। दिल्ली-एनसीआर में यमुना एक्सप्रेसवे पर फॉग और कंस्ट्रक्शन पिट्स ने भी कई बाइक सवारों की जान ली। बढ़ते दोपहिया वाहनों की संख्या (26 करोड़ से ज्यादा), गिग इकोनॉमी (डिलीवरी बॉयज की जल्दबाजी) और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर ने समस्या को बढ़ावा दिया है।

सरकार की तरफ से क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
केंद्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारें सक्रिय हैं। केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है—1 जनवरी 2026 से सभी नई बाइक्स पर एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही हर नई बाइक के साथ दो BIS सर्टिफाइड हेलमेट देने होंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर AI आधारित सेफ्टी ऐप्स और हाइपरलोकल मॉडल विकसित कर रहा है। 100 हाई-रिस्क जिलों में ‘सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम’ चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और यूएन की #MakeASafetyStatement कैंपेन भी जोरों पर है।

दिल्ली सरकार ने 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50% कमी का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बाइक सवार की खाई में गिरने वाली घटना के बाद 8 सूत्रीय सुरक्षा फ्रेमवर्क जारी किया। सभी खुदाई स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग, साइनेज और जवाबदेही तय। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जीरो टॉलरेंस ड्राइव, स्पीड कैमरा, 328 नए एडवांस्ड कैमरे (हेलमेट चेकिंग सहित) और रिंग रोड पर जीरो टॉलरेंस जोन बनाए। हेलमेट न पहनने पर भारी चालान और जागरूकता रैलियां चल रही हैं।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से नेशनल हाईवे पर 2025 में दुर्घटनाएं और मौतें 11% घटीं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर साइनेज और मरम्मत तेज की। जनवरी 2026 को रोड सेफ्टी मंथ मनाया गया, जिसमें ‘नो हेलमेट नो फ्यूल’ जैसे अभियान और चालान अभियान चले। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट कम की गई।

निष्कर्ष और अपील
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ सुधार दिख रहे हैं, लेकिन दिल्ली-एनसीआर और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अभी भी चुनौतियां बाकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त जागरूकता और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार से ही दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। सरकारें लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं, लेकिन नागरिकों को भी हेलमेट, स्पीड लिमिट और सेफ राइडिंग का पालन करना होगा। सड़क सुरक्षा सिर्फ कानून नहीं, जीवन रक्षा का मुद्दा है।

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