वीडियो में महिला कहती सुनाई देती हैं, “अगर लड़की होकर उपनगरों में आना चाहती हो तो दो बार सोच लो। शहर का हिस्सा बहुत अच्छा है, लेकिन उपनगर? नहीं। मैं इस जगह से जल्द से जल्द निकलना चाहती हूं।” कैप्शन में उन्होंने लिखा, “Outskirts bhi develop kardo yawrrr।”
यह वीडियो अब तक लाखों व्यूज प्राप्त कर चुका है और विभिन्न मीडिया ने इसकी कवरेज की है। वीडियो ने महिलाओं की सुरक्षा, खासकर उपनगरीय क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
सोशल मीडिया पर बंटे मत
वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं पूरी तरह विभाजित हैं:
• सहानुभूति और समर्थन: कई यूजर्स ने महिला की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “बेंगलुरु के उपनगर दिन में भी खतरनाक लगते हैं, ऐसे इलाकों से गुजरते समय कैमरा ऑन रखो।” दूसरे ने कहा, “आजकल रात 9 बजे के बाद बेंगलुरु में कहीं भी ऐसा ही लगता है।”
• आलोचना और बचाव: दूसरी तरफ कई लोगों ने इसे शहर की छवि खराब करने वाला बताया। एक कमेंट में लिखा गया, “बेंगलुरु बहुत सुरक्षित है। इमरजेंसी में 100 डायल करो, ऐसे वीडियो बनाकर अपने राज्य को नुकसान मत पहुंचाओ। ज्यादा सुरक्षा चाहिए तो सेंट्रल बेंगलुरु शिफ्ट हो जाओ।” एक अन्य यूजर ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, “शहर को बदनाम मत करो। मैं 13 साल से यहां हूं, हाल ही में उपनगर शिफ्ट किया—यहां दूसरे शहरों से बेहतर है। अगर डर लगता है तो पेपर स्प्रे रखो।”
कई यूजर्स ने तर्क दिया कि उपनगरों की यह स्थिति नोएडा, गुरुग्राम जैसे अन्य शहरों में भी आम है और शहर के केंद्र से तुलना करना उचित नहीं।
महिलाओं की सुरक्षा का यह मुद्दा बेंगलुरु में समय-समय पर उठता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, पेट्रोलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से उपनगरीय क्षेत्रों को सुरक्षित बनाया जा सकता है। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

