Bengal Assembly Elections 2026: कांग्रेस और वामपंथी दलों के गठबंधन पर क्यों अटके दोनों?

Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सीपीआई(एम) नेतृत्व वाले वाममोर्चा के बीच गठबंधन को लेकर गतिरोध बरकरार है। दोनों दल एक-दूसरे को ‘बोझ’ मान रहे हैं, जबकि राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच चल रहा है। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के एक धड़े का मानना है कि पार्टी को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए ताकि लंबे समय में संगठन का पुनरुद्धार हो सके, जबकि वाम दल कांग्रेस को बोझ मानकर सतर्क हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल कांग्रेस इकाई में मतभेद है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं। उनके करीबियों का तर्क है कि पिछले दो दशकों से गठबंधनों पर निर्भरता के कारण पार्टी का संगठन कमजोर हुआ है। 2006 के बाद कांग्रेस ने कभी 100 से ज्यादा सीटों पर अकेले चुनाव नहीं लड़ा। 2021 में वाम गठबंधन के साथ ‘संजुक्त मोर्चा’ बनाया गया था, लेकिन वह विफल रहा—गठबंधन को सिर्फ एक सीट मिली और वाम दल पहली बार पूरी तरह खाता नहीं खोल सके।

वाम दल भी गठबंधन को लेकर सशंकित हैं। एक वाम नेता ने कहा कि 2016 में सीपीआई(एम) का वोट शेयर करीब 20% था, जो 2021 में गठबंधन के बाद घटकर 4.71% रह गया, जबकि भाजपा का वोट शेयर 10% से बढ़कर 39% हो गया। उनका मानना है कि गठबंधन से उनके वोट भाजपा की ओर स्थानांतरित हुए।

ताजा अपडेट्स: हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कांग्रेस बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ज्यादातर जिला इकाइयां सीट बंटवारे के खिलाफ हैं। पार्टी अपनी ताकत दिखाने के लिए 28 जनवरी को कोलकाता के शहीद मीनार मैदान पर बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बना रही है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी शामिल हो सकती हैं।

वाम दलों की ओर से अभी कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया है। सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक कल से तिरुवनंतपुरम में शुरू हो रही है, जहां विभिन्न राज्यों के चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी, जिसमें बंगाल भी शामिल है। केरल में कांग्रेस और वाम के बीच कट्टर प्रतिद्वंद्विता को देखते हुए बंगाल में गठबंधन भाजपा को मुद्दा दे सकता है।

दो कोने का मुकाबला: टीएमसी पहले ही अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। भाजपा भी राज्य में मजबूत स्थिति बनाने में जुटी है। ऐसे में कांग्रेस और वाम के लिए गठबंधन या अकेले लड़ने का फैसला चुनौतीपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों दलों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है—गठबंधन न हुआ तो उनका वोट विभाजन भाजपा या टीएमसी को फायदा पहुंचा सकता है।

फिलहाल दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत नहीं हुई है, जबकि 2021 में दिसंबर 2020 तक गठबंधन की घोषणा हो गई थी। आने वाले दिनों में केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर नजर रहेगी।

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