BCCI still gets tax exemption on billions in IPL revenue: बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) का चैरिटेबल स्टेटस और टैक्स छूट का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। फरवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर विभाग की एक सलाह को रद्द कर दिया, जिसमें BCCI के टैक्स-एक्जेम्प्ट स्टेटस पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने साफ कहा कि विभाग बिना वैधानिक प्रक्रिया के कोई सलाह या नोटिस जारी नहीं कर सकता। इस फैसले से BCCI का सेक्शन 12A के तहत चैरिटेबल दर्जा बरकरार रहा और IPL समेत सभी आय पर टैक्स छूट जारी है।
BCCI 1928 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट (अब तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1975) के तहत पंजीकृत एक निजी संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में क्रिकेट को बढ़ावा देना है। आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत इसे चैरिटेबल संस्था माना जाता है, जिससे धारा 11 के तहत आय पर टैक्स छूट मिलती है—बशर्ते 85% आय क्रिकेट विकास पर खर्च हो।
विवाद की जड़ 2008 में IPL के लॉन्च के साथ शुरू हुई। आयकर विभाग का तर्क है कि IPL शुद्ध व्यावसायिक गतिविधि है। धारा 2(15) के प्रोविजो में कहा गया है कि अगर कोई सार्वजनिक उपयोगिता वाली संस्था व्यापार से बड़ी आय कमाती है, तो छूट नहीं मिलनी चाहिए। BCCI का पक्ष है कि IPL सिर्फ संसाधन जुटाने का जरिया है और इससे मिली कमाई का उपयोग क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू टूर्नामेंट और महिला क्रिकेट के विकास में होता है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, BCCI की FY 2023-24 की कुल आय ₹9,741.71 करोड़ थी, जिसमें IPL का बड़ा हिस्सा शामिल था। FY 2025-26 के लिए BCCI के वार्षिक बजट में कुल सरप्लस ₹6,700 करोड़ का अनुमान है, जिसमें IPL अकेले लगभग ₹5,000 करोड़ का योगदान देगा। एशिया कप होस्टिंग से अतिरिक्त ₹100 करोड़ से ज्यादा का फायदा होगा। 2008 में IPL का राजस्व ₹661 करोड़ था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है। BCCI ने FY24 में आयकर के रूप में ₹0 टैक्स जमा किया—क्योंकि इसका स्टेटस चैरिटेबल है।
2021 में मुंबई आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) ने BCCI के पक्ष में फैसला दिया था कि सिर्फ व्यावसायिक गतिविधि बढ़ने से चैरिटेबल पंजीकरण रद्द नहीं होता। फरवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी विभाग की सलाह को खारिज कर दिया और कहा कि BCCI का स्टेटस वैधानिक प्रक्रिया से ही जांचा जा सकता है। हालांकि, विभाग हर साल आय का आकलन करता है कि कितनी आय पर छूट दी जाए। मामला अभी भी कुछ पहलुओं में अदालतों में सबजुडिस है।
इस मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं कि जब वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान, स्टार्टअप और अन्य सेक्टर टैक्स देते हैं, तो एक अरबों कमाने वाली क्रिकेट लीग को ‘चैरिटी’ के नाम पर छूट क्यों? BCCI का कहना है कि IPL की कमाई का 100% क्रिकेट के विकास में लगता है, लेकिन आलोचक इसे भारत की टैक्स प्रणाली में निष्पक्षता और प्रभाव का मुद्दा मानते हैं। BCCI का स्टेटस फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन विवाद जारी है। IPL के व्यवसायीकरण ने क्रिकेट को वैश्विक ब्रांड बना दिया है, लेकिन टैक्स न्याय के सवाल पर बहस छिड़ी हुई है। आगे क्या होगा, यह आयकर विभाग की अगली कार्रवाई और अदालती फैसलों पर निर्भर करेगा।

