जयपुर में कृत्रिम बारिश का प्रयोग हुआ विफल, खराबी और भीड़ ने रोका ऐतिहासिक प्रयास

Artificial rain in Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार को रामगढ़ बांध क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराने की महत्वाकांक्षी योजना तकनीकी खराबी और भारी भीड़ के कारण असफल रही। यह प्रयोग देश में पहली बार ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के माध्यम से छोटे क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराने का प्रयास था, जिसका उद्देश्य सूखे पड़े रामगढ़ बांध को पुनर्जनन और मानसून की कमी को पूरा करना था।
क्या हुआ रामगढ़ बांध पर?
जयपुर के ऐतिहासिक रामगढ़ बांध, जो पिछले दो दशकों से सूखा पड़ा है, को भरने के लिए राजस्थान सरकार और अमेरिका-बेंगलुरु आधारित कंपनी जेन एक्स एआई ने मिलकर यह प्रयोग शुरू किया था। ड्रोन के जरिए बादलों में सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का छिड़काव कर बारिश की बूंदें बनाने की योजना थी। ताइवान से मंगवाए गए विशेष ड्रोन का उपयोग होना था, जिसे AI सिस्टम द्वारा नियंत्रित किया जाना था।
हालांकि, मंगलवार को दोपहर 2 बजे शुरू होने वाले इस प्रयोग में पहला प्रयास सुबह असफल रहा, जब ड्रोन के पंखे चालू तो हुए, लेकिन वह जमीन से नहीं उठ सका। दोपहर में किए गए दूसरे प्रयास में ड्रोन कुछ फीट ऊंचाई तक उड़ा, लेकिन GPS सिग्नल में गड़बड़ी के कारण संतुलन खो बैठा और पास की झाड़ियों में जा गिरा। तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि क्षेत्र में भारी भीड़ और मोबाइल नेटवर्क की अधिकता के कारण रेडियो फ्रीक्वेंसी इंटरफेयरेंस बढ़ गया, जिसने ड्रोन के GPS सिस्टम को प्रभावित किया।
भीड़ ने बढ़ाई मुश्किलें
इस ऐतिहासिक प्रयोग को देखने के लिए रामगढ़ बांध पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। स्थानीय लोगों और उत्साही दर्शकों ने ड्रोन के गिरते ही वीडियो और सेल्फी लेना शुरू कर दिया, जिससे स्थिति और अव्यवस्थित हो गई। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने ड्रोन को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, लेकिन इस घटना ने सवाल उठाए कि क्या ऐसी महत्वपूर्ण तकनीकी परियोजनाओं के लिए भीड़ को पहले से नियंत्रित करने की योजना नहीं बनानी चाहिए थी।
कृषि मंत्री का बयान
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जो इस परियोजना के प्रबल समर्थक रहे हैं, ने निराशा जताते हुए कहा कि तकनीकी टीम समस्या के समाधान में जुटी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगला प्रयास तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक भीड़ को नियंत्रित करने और नेटवर्क सामान्य करने की व्यवस्था नहीं हो जाती। मंत्री ने यह भी बताया कि अगले दो महीनों में 60 क्लाउड सीडिंग प्रयोग किए जाएंगे, और इस डेटा को सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
कृत्रिम बारिश की जरूरत
राजस्थान लंबे समय से अनियमित मानसून और सूखे की समस्या से जूझ रहा है। रामगढ़ बांध, जो कभी जयपुर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत था, 1981 के बाद पूरी तरह नहीं भरा है। यह प्रयोग न केवल बांध को पुनर्जनन करने का प्रयास था, बल्कि किसानों की फसलों को बचाने और पेयजल संकट को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा था।
आगे की योजना
प्रशासन और तकनीकी टीम अब वैकल्पिक तकनीकों और बेहतर योजना पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में GPS आधारित उपकरणों का उपयोग चुनौतीपूर्ण होता है, और इसके लिए विशेष उपायों की जरूरत है। अगले प्रयास से पहले प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और नेटवर्क स्थिरता सुनिश्चित करने की योजना बनाई है।
निष्कर्ष
जयपुर का यह कृत्रिम बारिश प्रयोग न केवल तकनीकी नवाचार का प्रतीक था, बल्कि सूखा प्रभावित राजस्थान के लिए एक नई उम्मीद भी जगा रहा था। हालांकि, मंगलवार की असफलता ने तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों की कमी को उजागर किया है। अब देखना यह है कि क्या अगला प्रयास इस ऐतिहासिक परियोजना को सफलता की ओर ले जाएगा।

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