Anti-ICE protests wreak havoc in the US: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों की वजह मिनेसोटा में दो अमेरिकी नागरिकों – रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी – की आईसीई एजेंट्स द्वारा गोली मारकर हत्या है। इसी क्रम में पूर्व सीएनएन पत्रकार डॉन लेमन को 30 जनवरी को गिरफ्तार किया गया, लेकिन कोर्ट ने उन्हें बिना जमानत रिहा कर दिया। लेमन पर आरोप है कि उन्होंने मिनेसोटा के एक चर्च में एंटी-आईसीई प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर धार्मिक सेवा बाधित की।
डॉन लेमन की गिरफ्तारी और रिहाई
30 जनवरी को लॉस एंजिल्स में ग्रैमी अवॉर्ड्स कवरेज के दौरान फेडरल एजेंट्स ने डॉन लेमन को गिरफ्तार किया। उन पर दो गंभीर संघीय आरोप लगे हैं – धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के खिलाफ साजिश और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रयोग करते समय चोट पहुंचाने की कोशिश।
यह मामला 18 जनवरी का है, जब सेंट पॉल के सिटीज चर्च में एंटी-आईसीई प्रदर्शनकारियों ने सेवा बाधित की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि चर्च का एक पास्टर सेंट पॉल आईसीई फील्ड ऑफिस का कार्यकारी निदेशक है। वे “जस्टिस फॉर रेनी गुड” और “आईसीई आउट” के नारे लगा रहे थे।
आरोपपत्र में कहा गया कि लेमन ने प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर चर्च के सदस्यों को धमकाया और रास्ता रोका। लेमन ने इंस्टाग्राम पर लाइव वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य रिपोर्टिंग है, न कि प्रदर्शन में शामिल होना।
लेमन के वकील एबी लोवेल ने इसे “फर्स्ट अमेंडमेंट पर अभूतपूर्व हमला” बताया और कहा कि लेमन सिर्फ पत्रकारिता कर रहे थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद लेमन को बिना बेल रिहा कर दिया गया। कोर्ट के बाहर लेमन ने कहा, “मैं चुप नहीं रहूंगा। फर्स्ट अमेंडमेंट मेरी और अन्य पत्रकारों की रक्षा करता है।”
अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी की जिम्मेदारी ली और कहा कि पूजा स्थलों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। व्हाइट हाउस के आधिकारिक अकाउंट ने लेमन की गिरफ्तारी पर मीम पोस्ट किया।
देशव्यापी एंटी-आईसीई प्रदर्शन
30 जनवरी को “नेशनल शटडाउन” के तहत पूरे अमेरिका में प्रदर्शन हुए – कोई काम नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई खरीदारी नहीं। मिनियापोलिस, लॉस एंजिल्स, सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क सहित कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे।
कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। लॉस एंजिल्स में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, पत्थर फेंके गए और फेडरल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ रिपोर्ट्स में सोशलिस्ट ग्रुप्स के शामिल होने की बात कही गई है।
प्रदर्शनकारियों ने रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी की मौत के खिलाफ नारे लगाए। दोनों की मौत आईसीई ऑपरेशंस के दौरान हुई। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने प्रेट्टी की मौत की सिविल राइट्स जांच शुरू की है।
जनमत और राजनीतिक प्रतिक्रिया
ओपिनियन पोल्स में ज्यादातर अमेरिकी ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों से असहमत हैं। कई लोग आईसीई की कार्रवाइयों को “बहुत आगे बढ़ चुकी” बता रहे हैं।
यह एक विकासशील कहानी है। प्रदर्शन जारी हैं और आगे अपडेट्स के साथ जानकारी दी जाएगी।

