एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को मिला आईएस-आईएसओ सर्टिफिकेट

मानव तस्करी रोकथाम के तरीकों और प्रक्रियाओं को बीआईएस ने किया प्रदान
new delhi news   अपराध शाखा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को ब्यूरो आॅफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा आईएस-आईएसओ-9001:2015 सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र यूनिट द्वारा मानव तस्करी, लापता बच्चों और अन्य संबंधित मामलों के समाधान में अपनाए गए उच्च मानकों और प्रक्रियाओं के लिए दिया गया है।

new delhi news

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, अपराध शाखा, सेक्टर-16, रोहिणी, दिल्ली, की स्थापना 10 मार्च 2014 को की गई थी। यह विशेष इकाई मानव तस्करी, अपहरण, लापता बच्चों, अनाथ बच्चों, भिखारियों, बाल श्रमिकों और यौन शोषण से जुड़े मामलों को संभालने के लिए गठित की गई थी। इसके कार्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली महिला आयोग और विभिन्न न्यायालयों द्वारा मॉनिटर किए जाते हैं। एएचटीयू टीम ने पिछले 10 वर्षों की मेहनत और उपलब्धियों को मान्यता दिलाने के लिए अपने कार्य को मानकीकृत करने का निर्णय लिया। डीसीपी क्राइम विक्रम सिंह और एसीपी अरुण चौहान के नेतृत्व में टीम ने दो महीने तक कठोर परिश्रम कर आॅपरेटिंग प्रक्रियाओं को तैयार किया और उनका दस्तावेजीकरण किया।
बीआईएस अधिकारियों ने यूनिट की प्रक्रियाओं और दस्तावेजों की जांच, आॅडिट और पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। विस्तृत आॅडिट के बाद, एएचटीयू को आईएस-आईएसओ-9001:2015 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।
पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने बीएसआई अधिकारियों की उपस्थिति में अऌळव को करड प्रमाणपत्र प्रदान किया। उन्होंने टीम की सराहना करते हुए उनके समर्पण और पेशेवर दृष्टिकोण की प्रशंसा की और उन्हें इसी उत्साह से काम करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर, उन्होंने एएचटीयू द्वारा बचाए गए बच्चों और उनके परिवारों से भी मुलाकात की।
प्रमुख कार्य
लावारिस बच्चों, भिखारियों और बाल श्रमिकों का बचाव एवं पुनर्वास।
रेड लाइट क्षेत्रों में छापेमारी कर नाबालिग लड़कियों को यौन शोषण से बचाना।
औद्योगिक क्षेत्रों में छापेमारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराना।
संगठित बाल भिक्षावृत्ति में शामिल गिरोहों पर निगरानी।
‘आॅपरेशन मिलाप’ और ‘मुस्कान’ के तहत बच्चों के घर-घर जाकर सत्यापन और पुनर्मिलन।
उपलब्धियां
2014 में स्थापना के बाद से एएचटीयू ने हजारों लापता बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों से मिलाया है। पिछले पांच वर्षों में 1,442 नाबालिग (1,045 लड़कियां और 397 लड़के) और 2,013 वयस्कों को बरामद कर उनके परिवारों को सौंपा गया।
2024 में एएचटीयू ने 227 लापता बच्चों को ढूंढा, जिनमें से 89 बच्चे दिल्ली के बाहर विभिन्न राज्यों से बरामद किए गए। इन मामलों के समाधान से 150 से अधिक एफआईआर का निपटारा हुआ और 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

new delhi news

यहां से शेयर करें