अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट से गिरफ्तार

नई दिल्ली: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर राजधानी के इंडिया गेट पर धरना दे रहे पीड़िता के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार सुबह करीब 4 बजे हिरासत में ले लिया। कुछ घंटे बाद सुबह करीब 5 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। इस दौरान कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वानंत्रा रिसॉर्ट में हुई थी। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे) और दो अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। परिवार लंबे समय से मामले में कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग कर रहा है।

धरने की वजह

अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध किया। उनका आरोप है कि गौतम इस मामले में कथित रूप से जुड़े हैं। परिवार की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। गौतम को हाल ही में राज्यपाल पद पर नियुक्त किया गया था।

वीरेंद्र सिंह भंडारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील करते हुए कहा, “दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए। सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल न बनाया जाए।” मां सोनी देवी ने आंसू बहाते हुए कहा कि नियुक्ति रद्द होने तक वे अडिग रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर धरना जारी रखने की अनुमति नहीं मिली तो वे घर पर भूख हड़ताल शुरू कर देंगी। पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया और कहा कि न्याय नहीं मिला तो देशभर में आंदोलन होगा।

राहुल-प्रियंका की मुलाकात

बुधवार शाम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पहुंचे और अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। प्रियंका गांधी ने मां को गले लगाया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि चार साल से परिवार को न्याय नहीं मिला, जबकि कथित आरोपी को संवैधानिक पद मिला। उन्होंने कांग्रेस का समर्थन दोहराया।

पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

रातभर चले धरने के बाद गुरुवार सुबह पुलिस ने माता-पिता समेत पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, उदय भानु चिब और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर बदसलूकी और न्याय मांगने वालों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और काजी निजामुद्दीन ने कार्रवाई की निंदा की। कांग्रेस का कहना है कि रिहाई के बाद माता-पिता किसी रिश्तेदार के यहां चले गए।

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने नेताओं को बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पक्ष रहा है कि सरकार ने आरोपियों की गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, सजा और सीबीआई जांच सुनिश्चित की है।

यह मामला 2022 से राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। परिवार अब भी सीबीआई जांच में कथित वीआईपी की भूमिका की पूरी पड़ताल की मांग कर रहा है। घटनाक्रम अभी जारी है।

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