America’s Growing Dilemma in the Iran War: अमेरिका और इजराइल के नेतृत्व वाले ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के 11वें दिन क्षेत्रीय तनाव नया मोड़ ले चुका है। एक ओर अमेरिकी प्रशासन ईरान के परमाणु स्थलों पर दबे यूरेनियम स्टॉक को जब्त करने के लिए बड़े पैमाने पर विशेष अभियान बलों (स्पेशल ऑप्स) की तैनाती पर विचार कर रहा है, वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध की समयसीमा और लक्ष्यों पर विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। ठीक इसी बीच मंगलवार को बगदाद में अमेरिकी कूटनीतिक सुविधा पर ईरान समर्थित मिलिशिया का ड्रोन हमला हो गया, जिसे प्रत्यक्ष जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है।
पेंटागन और विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले साल जून में ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के नेटांज और इस्फहान जैसे परमाणु ठिकानों पर बमबारी के बाद समृद्ध यूरेनियम (60% शुद्धता का लगभग 970 पाउंड और 20% का 2,200 पाउंड) भूमिगत दब गया है। इसे जब्त करने या पूरी तरह नष्ट करने के लिए हवाई हमले पर्याप्त नहीं है इसके लिए एक बड़ा स्पेशल ऑप्स फोर्स (जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड का हमला दल) मैदान में उतारना पड़ेगा, जिसमें एयरबोर्न यूनिट्स परिधि सुरक्षा (परिमीटर कॉर्डन) बनाएंगी और इंजीनियरिंग टीमें यूरेनियम निकालेंगी। पूर्व रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने इसे “बहुत खतरनाक और जोखिम भरा” बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में कहा था कि जमीनी सैनिक “बहुत अच्छे कारण” के लिए ही भेजे जाएंगे, लेकिन न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए बयान में साफ किया—“हमने अभी कोई फैसला नहीं लिया, हम इसके कहीं करीब भी नहीं हैं।”
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मंगलवार को पेंटागन से कहा कि युद्ध “हमारी समयसीमा पर और हमारे चुनाव के मुताबिक” खत्म होगा। उन्होंने साफ किया—“यह 2003 का इराक नहीं है, राष्ट्र-निर्माण या मिशन क्रिप की कोई गुंजाइश नहीं।” लेकिन ट्रंप ने सीबीएस न्यूज को बताया कि युद्ध “बहुत पूरा हो चुका है” और “बहुत जल्द खत्म” हो जाएगा, जबकि पेंटागन के आधिकारिक अकाउंट ने लिखा—“हमने लड़ना अभी शुरू ही किया है।” ट्रंप ने मोझतबा खामेनेई (नए ईरानी सुप्रीम लीडर) को चेतावनी भी दी कि अमेरिकी मंजूरी के बिना वे टिक नहीं पाएंगे। हेगसेथ ने जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ही तय करेंगे कब अभियान समाप्त होगा।
इसी बीच मंगलवार रात बगदाद के डिप्लोमैटिक सपोर्ट सेंटर (बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी कूटनीतिक लॉजिस्टिक हब) पर छह ड्रोन दागे गए। पांच को एयर डिफेंस ने मार गिराया, एक ने गार्ड टावर के पास हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों और स्टेट डिपार्टमेंट अलर्ट के मुताबिक किसी की जान नहीं गई और सभी सुरक्षित हैं। हमले की जिम्मेदारी ईरान समर्थित ‘इस्लामिक रेसिस्टेंस इन इराक’ पर मानी जा रही है। यह हमला अमेरिका-इजराइल के ईरान अभियान का प्रत्यक्ष जवाब है। क्षेत्र में पहले भी कुवैत, दुबई और रियाद में अमेरिकी ठिकानों पर हमले हो चुके हैं। अभियान शुरू होने के बाद अब तक सात अमेरिकी सैनिक शहीद हो चुके हैं और 140 घायल (ज्यादातर मामूली रूप से)। मंगलवार-बुधवार को ईरान पर सबसे तीव्र हमले हुए। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खदानें बिछाने और तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है।
ट्रंप प्रशासन स्पष्ट रूप से कह रहा है कि इसका लक्ष्य ईरान की नौसेना, बैलिस्टिक मिसाइलें, परमाणु क्षमता और आतंकवाद फंडिंग खत्म करना है न कि इराक जैसा लंबा कब्जा या राष्ट्र-निर्माण। लेकिन विशेषज्ञ चेताव रहे हैं कि यदि यूरेनियम जब्त करने के लिए जमीनी बल भेजे गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल ट्रंप ने जमीनी सैनिकों को “छोटे दस्ते” के रूप में इस्तेमाल करने में निजी रुचि दिखाई है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया। क्षेत्रीय तनाव के बीच बगदाद हमले ने इराक को भी युद्ध के घेरे में खींच लिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सभी ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आगे की स्थिति ट्रंप के अगले फैसले पर निर्भर करेगी, क्या युद्ध हवा से ही खत्म होगा या ईरान के अंदर विशेष बलों का अभियान शुरू होगा।

