Noida Authority News: नोएडा प्राधिकरण में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस प्राधिकरण को नियोजन और विकास का मॉडल माना जाता था, वहां अब विभागों की जिम्मेदारियां ही उलट-पुलट दिखाई दे रही हैं। ताजा मामला प्लानिंग विभाग से जुड़ा है, जहां नियोजन से सीधे जुड़े अधिकारियों की बजाय सिविल और जल विभाग के अफसरों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इससे न केवल विभागीय संतुलन बिगड़ा है, बल्कि शहर की प्लानिंग प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ऐसे में सीईओ की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे है।
प्लानिंग में अव्यवस्था
सूत्रों के अनुसार, प्लानिंग विभाग में इस समय सिविल इंजीनियरिंग और जल विभाग से जुड़े अधिकारी तैनात हैं, जबकि नियोजन विभाग के अपने विशेषज्ञ अधिकारियों को अपेक्षित भूमिका नहीं मिल पा रही है। प्लान पास करने, लेआउट स्वीकृति, मास्टर प्लान से जुड़े निर्णय और भूमि उपयोग जैसे संवेदनशील मामलों में गैर-प्लानिंग अधिकारियों की दखल बढ़ने से अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। इसका सीधा असर अवैध निर्माण, नक्शा स्वीकृति में देरी और नियमों की अनदेखी के रूप में सामने आ रहा है। प्राधिकरण के अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि जब प्लानिंग का काम प्लानिंग एक्सपर्ट ही नहीं करेंगे, तो शहर का संतुलित विकास कैसे संभव होगा। सिविल और जल विभाग की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन उन्हें नियोजन विभाग में तैनात करना कई सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि यही कारण है कि नोएडा में अवैध निर्माण और अनियोजित विकास की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
सही अधिकारियों की तैनाती और नियमों का पालन, सीईओ की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम की भूमिका और जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में है। सीईओ होने के नाते प्राधिकरण के सभी विभागों की कार्यप्रणाली, सही अधिकारियों की तैनाती और नियमों का पालन सुनिश्चित कराना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। यदि प्लानिंग जैसे अहम विभाग में गलत तैनाती के कारण अव्यवस्था फैली है, तो इसकी जवाबदेही शीर्ष स्तर पर तय होना लाजमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही विभागीय ढांचे को दुरुस्त नहीं किया गया और प्लानिंग विभाग में नियोजन के जानकार अधिकारियों को जिम्मेदारी नहीं दी गई, तो नोएडा का विकास और अधिक बेतरतीब हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीईओ लोकेश एम इस उलट-पुलट व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

