Plane Crash: महाराष्ट्र के बारामती में उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे का शिकार हो गया। लैंडिंग के वक्त विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। जिसमें डिप्टी सीएम अजित पवार और 3 अन्य लोगों की मौत हो गई। निजी विमान एयरपोर्ट पर उतरते समय क्रैश हुआ है। अजित पवार जिला परिषद चुनावों को लेकर आज (बुधवार) बारामती में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए आए थे। घटनास्थल से वीडियो भी सामने आया है। जो कि काफी डरावनी है। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ मौजूद हैं। विमान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है।
कौन थे अजित पवार?
अजित पवार (Ajit Pawar Biography) का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं। साल 1991 में अजित पवार पहली बार बारामती से विधायक बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बारामती सीट को उन्होंने अपना अभेद्य किला बना लिया, जहां से उन्हें हर बार जनता का भरोसा मिला। यही सीट उन्हें राज्य स्तर की राजनीति में मजबूती से स्थापित करती चली गई और इसी इलाके में उनका प्लेन क्रैश हुआ।
अजित पवार के उप मुख्यमंत्री कार्यकाल:
- 10 नवंबर 2010 – 25 सितंबर 2012 (मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण)
- 25 अक्तूबर 2012 – 26 सितंबर 2014 (मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण)
- 23 नवंबर 2019 – 26 नवंबर 2019 (मुख्यमंत्री: देवेंद्र फडणवीस)
- 30 दिसंबर 2019 – 29 जून 2022 (मुख्यमंत्री: उद्धव ठाकरे)
- 2 जुलाई 2023 – वर्तमान (मुख्यमंत्री: एकनाथ शिंदे / देवेंद्र फडणवीस सरकार)
वह दिसंबर 2024 से देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के 8वें उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहें।
राजनीतिक सफर कैसे रहा?
अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह मात्र 20 वर्ष के थे। उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा।
- 1991: पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, 16 साल तक इस पद पर रहे।
- 1991: बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी।
- उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए।
- 1992-1993: कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने।
- साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार जीतते रहे।
उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।
सत्ता तक पहुंच का सफर
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला। हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे।
विवादों से रिश्ता
- अजित पवार का राजनीतिक जीवन विवादों से भी जुड़ा रहा है।
- 2013: “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” वाला बयान, जिसकी काफी आलोचना हुई। बाद में उन्होंने माफी मांगी।
- 2014: लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप।
- भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप भी समय-समय पर लगे
- लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट में कथित मदद और अन्य मामलों को लेकर विवाद।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे।
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