क्या हुआ था?
मुख्य वजह पायलटों की रोस्टरिंग में “प्लानिंग गैप” और नए पायलट ड्यूटी नियमों के तहत उपलब्धता का गलत आकलन था। DGCA के नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम 1 नवंबर 2025 से लागू हुए, जिनमें रात की ड्यूटी और आराम के सख्त प्रावधान थे। इंडिगो को कमांडर पायलटों की कमी (करीब 65) महसूस हुई। इसके साथ ही मौसम, तकनीकी गड़बड़ी और विमानन सिस्टम की भीड़ ने समस्या बढ़ाई।
एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई — क्रू गलत स्टेशन पर पहुंच गए, सामान बिना यात्रियों के गंतव्य पर पहुंचा, यात्री गुस्से में नारे लगाने लगे और कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। इंडिगो ने पायलटों से छुट्टी रद्द करने की अपील की और अतिरिक्त भत्ता देने की पेशकश की। अंत में DGCA ने बड़े पैमाने पर व्यवधान को देखते हुए नए नियमों से छूट दी, जो 10 फरवरी 2026 तक वैध रहेंगे।
नए नियमों का बैकग्राउंड
यह विवाद पुराना है। 2010 के मंगलूर क्रैश के बाद 2011 में पायलटों के लिए अनुकूल FDTL नियम बने थे, जिनमें रात की ड्यूटी पर सख्ती थी (जैसे लगातार दो रात ड्यूटी नहीं, अधिकतम 2 लैंडिंग रात में)। लेकिन 2019 में इन्हें ढीला कर दिया गया ताकि एयरलाइंस शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर क्रू का अधिक इस्तेमाल कर सकें।
पायलट संघों के विरोध और कोर्ट केस के बाद जनवरी 2024 में संशोधित नियम आए, जिनमें साप्ताहिक आराम 36 से 48 घंटे, रात में अधिकतम 2 लैंडिंग और ड्यूटी टाइम 10 घंटे तक सीमित किया गया। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आदेश अप्रैल 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया — रात की ड्यूटी वाले प्रावधान 1 नवंबर से। इंडिगो इन्हीं प्रावधानों पर छूट मिली है।
अन्य एयरलाइंस क्यों नहीं प्रभावित हुईं?
एयर इंडिया, अकासा और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के पास अतिरिक्त पायलट थे — ग्राउंडेड विमानों, देरी से डिलीवरी या कम ऑपरेशन की वजह से। इंडिगो की हाइपर-एफिशिएंसी और कम लागत नीति ने पायलटों पर सबसे ज्यादा दबाव डाला, जिससे मार्जिन बहुत कम रह गया।
अब स्थिति क्या है?
DGCA की छूट और नेटवर्क एडजस्टमेंट के बाद इंडिगो की ऑपरेशंस मध्य दिसंबर से स्थिर हो गई हैं। 9 दिसंबर के बाद से रोजाना 1,900 से 2,050 उड़ानें चल रही हैं, सभी 138 डेस्टिनेशन जुड़े हुए हैं और ऑन-टाइम परफॉर्मेंस सामान्य स्तर पर लौट आया है। सम-डे कैंसलेशन लगभग खत्म हो गए (मौसम या तकनीकी मामूली कारणों को छोड़कर)।
हालांकि 16 दिसंबर को उत्तर भारत में घने कोहरे की वजह से कुछ उड़ानें रद्द हुईं, लेकिन यह रोस्टरिंग संकट से जुड़ा नहीं है। इंडिगो ने यात्रियों से माफी मांगी है और प्रभावितों को रिफंड-मुआवजा प्रक्रिया जारी है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन को कर्मचारी मनोबल सुधारने, पायलट ट्रेनिंग की महंगी फीस की समस्या करने और यात्री अधिकार चार्टर को मजबूत करने की जरूरत है। DGCA को भी मानवीय कारकों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। कुल मिलाकर संकट से सबक लेते हुए इंडिगो अब सामान्य ऑपरेशन की ओर बढ़ चुकी है, लेकिन सर्दियों के मौसम में कोहरा नई चुनौती बना हुआ है।

