जन सुराज पार्टी ने बिहार की 243 सीटों में से 238 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी को मात्र 3.34% वोट मिले और 99% से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। कई सीटों पर पार्टी को NOTA से भी कम वोट मिले। चुनाव हार के बाद पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं।
पार्टी के मीडिया प्रभारी ओबैदुर रहमान ने बताया कि JSPT को चुनाव से पांच-छह महीने पहले बनाया गया था और इन कर्मचारियों को सभी 243 निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवारों की मदद के लिए केवल चुनाव अवधि तक के लिए नियुक्त किया गया था। चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें हटा दिया गया। रहमान ने स्पष्ट किया कि यह छंटनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज से जुड़ी नहीं है, बल्कि केवल कंसल्टेंसी फर्म से संबंधित है।
हालांकि, कुछ बर्खास्त कर्मचारियों ने शिकायत की है कि उन्हें दिसंबर 2025 का वेतन अभी तक नहीं मिला है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कई लोग अच्छी कंपनियां छोड़कर यहां आए थे, लेकिन हमें पहले से नहीं बताया गया कि नौकरी केवल चुनाव तक की है। अब हमें छोड़ दिया गया है और सीवी पर भी बुरा असर पड़ा है।” कर्मचारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस्तीफा देने को कहा गया और पूरा भुगतान बाद में करने का आश्वासन दिया गया।
पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
फिलहाल पार्टी या प्रशांत किशोर की ओर से कोई नया बयान सामने नहीं आया है।

