AAIB News: भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी की खामियां एक बार फिर चर्चा में हैं। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की हालिया रिपोर्ट्स ने न केवल विमानन कंपनियों और हवाई अड्डों की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि खुद AAIB और भारतीय नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं
रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि जब ऑडिटर (निगरानी करने वाली संस्था) की निगरानी में खामियां हों, तो उसका ऑडिट कौन करता है?
AAIB की जांच में क्या सामने आया?
AAIB, जो भारत में विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की जांच के लिए 2012 में स्थापित एक स्वायत्त संस्था है, ने अपनी 68 अंतिम जांच रिपोर्ट्स में से 47% मामलों में विमानन ऑपरेटरों और हवाई अड्डों द्वारा उल्लंघन या लापरवाही की बात कही है। इनमें खराब रखरखाव, अपर्याप्त प्रशिक्षण, और सुरक्षा नियमों की अनदेखी जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, ये खामियां हमेशा दुर्घटनाओं का प्रत्यक्ष कारण नहीं होतीं, लेकिन यह भारतीय विमानन क्षेत्र में ‘सुरक्षा संस्कृति’ की कमी को दर्शाती रही हैं।
उदाहरण के लिए, हाल की कुछ घटनाओं में हवाई अड्डों की दीवारों में दरारें, रनवे पर जंगली जानवरों का प्रवेश, और ग्राउंड हैंडलिंग में चूक जैसे मामले सामने आए हैं। ये घटनाएं न केवल हवाई अड्डों की प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि नियामक संस्था DGCA की निगरानी की प्रभावशीलता को भी कठघरे में खड़ा करती हैं।
AAIB और DGCA के बीच टकराव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AAIB और DGCA के बीच कई बार मतभेद सामने आए हैं। AAIB की जांच का उद्देश्य भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कारणों की पहचान करना है, न कि दोषारोपण करना। फिर भी, DGCA और अन्य नियामक संस्थाएं AAIB की सिफारिशों को लागू करने में देरी करती हैं। उदाहरण के लिए, 2020 में कोझिकोड हवाई अड्डे पर हुई एयर इंडिया एक्सप्रेस की दुर्घटना, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी, की जांच के बाद दी गई सिफारिशें आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत का विमानन क्षेत्र वास्तव में सुरक्षा को प्राथमिकता देता है?
स्वायत्तता पर सवाल
AAIB को भले ही कागजों पर एक स्वायत्त संस्था कहा जाता हो, लेकिन यह नागर विमानन मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, जो DGCA और अन्य नियामक संस्थाओं को भी नियंत्रित करता है। यह स्थिति हितों के टकराव को जन्म दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि AAIB को पूरी तरह स्वतंत्र करने के लिए इसे संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। साथ ही, इसकी जांच रिपोर्ट्स को कानूनी कार्यवाही में इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि तकनीकी जांच का दुरुपयोग न हो।
हाल की घटनाएं और जांच
हाल ही में 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया की उड़ान AI-171 की दुर्घटना, जिसमें 241 यात्रियों और 19 अन्य लोगों की मौत हुई, ने भारतीय विमानन क्षेत्र को हिला दिया। AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उड़ान के कुछ सेकंड बाद ही दोनों इंजनों के ईंधन स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए, जिससे विमान में शक्ति की कमी हुई और वह क्रैश हो गया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट को दूसरे से पूछते सुना गया, “आपने ईंधन क्यों बंद किया?” जिसका जवाब था, “मैंने ऐसा नहीं किया।” इस रहस्यमयी घटना ने तकनीकी खराबी, मानवीय भूल, या अन्य कारणों की जांच को और गहरा कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सुरक्षा मानकों को बनाए रखने में चुनौतियां बरकरार हैं। कैप्टन अमित सिंह, जो सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के संस्थापक हैं, ने कहा कि विमानन दुर्घटनाएं अक्सर “छोटी-छोटी अनदेखी और सामान्यीकृत लापरवाही” का परिणाम होती हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने AAIB की जांच को और पारदर्शी बनाने की मांग की है, ताकि जनता और मीडिया में अनावश्यक अटकलों को रोका जा सके।
आगे की राह
रिपोर्ट में कुछ ठोस सुझाव दिए गए हैं:
1. AAIB की स्वतंत्रता: इसे संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जाए, न कि मंत्रालय के अधीन रखा जाए।
2. सिफारिशों का कार्यान्वयन: DGCA और अन्य नियामक संस्थाओं को AAIB की सिफारिशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करना चाहिए।
3. कानूनी सुधार: AAIB की जांच रिपोर्ट्स को आपराधिक मुकदमों में इस्तेमाल करने से रोकने के लिए नियम 19(3) में संशोधन किया जाए।
4. पारदर्शिता: जांच प्रक्रिया में और अधिक खुलापन लाया जाए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
निष्कर्ष
भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है, जो प्रतिदिन लाखों यात्रियों को सेवा देता है। लेकिन अगर सुरक्षा और निगरानी में खामियां बरकरार रहीं, तो यह विकास की कहानी अधूरी ही रहेगी। AAIB की रिपोर्ट्स ने जहां एक ओर ऑपरेटरों और नियामकों की कमियों को उजागर किया है, वहीं यह भी सवाल उठाया है कि क्या भारत का विमानन तंत्र वास्तव में वैश्विक मानकों के अनुरूप है? ‘ऑडिटर का ऑडिट’ करने की जिम्मेदारी अब सरकार और नीति-निर्माताओं पर है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

