घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय निवासियों और परिवार वालों का आरोप है कि इस खतरनाक गड्ढे और जलभराव की कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बच्चा स्कूल से लौटने के बाद घर के पास खेल रहा था, जब वह गड्ढे में गिर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो महीनों में ग्रेटर नोएडा और नोएडा में डूबने की यह तीसरी-चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता, दलेलगढ़ गांव में 3 साल के देवांश और अन्य जगहों पर भी इसी तरह के हादसे हो चुके हैं। कई मामलों में प्राधिकरण ने पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि जमीन निजी है या सरकारी तालाब नहीं है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। प्रीत विहार में भी गड्ढे को भरने या घेरने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन लापरवाही बरती गई।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बादलपुर पुलिस ने पुष्टि की है कि बच्चे को गड्ढे से निकाला गया, लेकिन बच नहीं पाया। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे सभी खतरनाक गड्ढों और जलभराव वाली जगहों को तुरंत भरवाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। यह घटना एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में बढ़ते जलभराव और निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद ऐसे गड्ढे मौत के जाल बन जाते हैं, और प्रशासन को तत्काल अभियान चलाना चाहिए। परिवार और स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।

