Ayodhya : अयोध्या। आस्था, परंपरा और राष्ट्रीय एकता के संगम राम जन्मभूमि मंदिर में गुरुवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण दर्ज हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधि-विधान के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना कर देश की धार्मिक चेतना से अपने जुड़ाव को एक नई ऊंचाई दी। इस दौरान उन्होंने श्रीरामलला के दर्शन किए, आरती उतारी और आशीर्वाद लिया।
वैदिक मंत्रों के बीच हुआ दिव्य अनुष्ठान
राम मंदिर के द्वितीय तल पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम यंत्र की स्थापना की गई। वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में राष्ट्रपति ने पूजन संपन्न किया। यह अनुष्ठान पूरी तरह पारंपरिक और शास्त्रोक्त विधियों के अनुसार हुआ, जिसने मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
शीर्ष नेतृत्व और संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ सहित कई संत-महात्मा और आचार्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम में देशभर से आए श्रद्धालुओं और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों की भी भागीदारी रही।
अयोध्या में पारंपरिक स्वागत, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
राष्ट्रपति के अयोध्या पहुंचने पर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्होंने आद्य शंकराचार्य द्वार से रामनगरी में प्रवेश किया।
उनके दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा के मद्देनजर शहर में रूट डायवर्जन लागू किया गया और भारी वाहनों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई गई।
दर्शन व्यवस्था में बदलाव, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर में दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया। जिस समय वह मंदिर परिसर में रहीं, उस दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रखा गया।
हालांकि, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर को पहले खोला गया और देर रात तक दर्शन की व्यवस्था की गई, जिससे बड़ी संख्या में भक्तों ने रामलला के दर्शन किए।
निधि समर्पण से निर्माण तक: आस्था का महाअभियान
राम मंदिर निर्माण केवल एक स्थापत्य परियोजना नहीं, बल्कि देश की सामूहिक आस्था का प्रतीक रहा है। 2021 में चले निधि समर्पण अभियान में 2500 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान मिला।
इस अभियान की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 5 लाख 100 रुपये के चेक से की थी।
इसमें योगी आदित्यनाथ, मोरारी बापू, शिवराज सिंह चौहान और मुकेश अंबानी जैसे कई प्रमुख लोगों ने योगदान दिया। समाज के हर वर्ग की भागीदारी ने इसे एक जनआंदोलन का रूप दिया।
आस्था और राष्ट्र भावना का प्रतीक बना राम मंदिर
श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ राम मंदिर एक बार फिर राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं के प्रति सर्वोच्च संवैधानिक पद की आस्था को भी दर्शाता है।
Ayodhya :

