A heated debate on pregnancy erupted in the US Senate: सीनेटर हॉले ने भारतीय मूल की डॉक्टर निशा वर्मा से 10 बार पूछा- ‘क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?’, डॉक्टर ने सीधा जवाब देने से इनकार किया

A heated debate on pregnancy erupted in the US Senate: अमेरिकी सीनेट की स्वास्थ्य समिति की सुनवाई में बुधवार (14 जनवरी) को उस वक्त तीखी बहस छिड़ गई जब रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉले ने भारतीय मूल की प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. निशा वर्मा से बार-बार पूछा कि क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं। डॉ. वर्मा ने इस सवाल का सीधा हां या न में जवाब देने से इनकार कर दिया और मरीजों की विविध जेंडर पहचान का हवाला दिया। यह बहस अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां लाखों लोग इसे देख चुके हैं और दोनों पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

सुनवाई का विवरण
सीनेट हेल्थ, एजुकेशन, लेबर एंड पेंशंस (HELP) कमिटी की सुनवाई का विषय था “महिलाओं की सुरक्षा: केमिकल एबॉर्शन ड्रग्स के खतरों का पर्दाफाश”। इस दौरान डेमोक्रेट्स की ओर से गवाह बनीं डॉ. निशा वर्मा (जॉर्जिया और मैसाचुसेट्स में प्रैक्टिस करने वाली ओबी/जीवाईएन) ने दवा आधारित गर्भपात (मिफेप्रिस्टोन) को सुरक्षित और प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि यह दवा 25 साल से ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रही है और लाखों महिलाओं ने इसका उपयोग किया है।

रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉले (मिसौरी) ने डॉ. वर्मा की वैज्ञानिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?” डॉ. वर्मा ने जवाब में कहा, “मैं विभिन्न जेंडर पहचान वाले मरीजों का इलाज करती हूं। मैं उन लोगों का भी ख्याल रखती हूं जो खुद को महिला नहीं मानते।” हॉले ने 10-11 बार यह सवाल दोहराया और जोर दिया कि यह जैविक सच्चाई स्थापित करने के लिए है, न कि राजनीति।

डॉ. वर्मा ने इसे “ध्रुवीकरण करने वाला राजनीतिक हथियार” करार दिया और कहा कि ऐसे हां/न सवाल मरीजों की जटिल वास्तविकता को सरलीकृत कर देते हैं। हॉले ने जवाब दिया, “यह ध्रुवीकरण नहीं, सच्चाई है। रिकॉर्ड के लिए: गर्भवती केवल महिलाएं होती हैं, पुरुष नहीं।” उन्होंने डॉ. वर्मा की गवाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और कहा कि विज्ञान को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।

वायरल वीडियो और प्रतिक्रियाएं
यह बहस का वीडियो सी-स्पैन, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) पर वायरल हो गया है, जिसे करोड़ों बार देखा जा चुका है। कंजर्वेटिव्स इसे “वोक आइडियोलॉजी की हार” बता रहे हैं और डॉ. वर्मा की आलोचना कर रहे हैं कि एक डॉक्टर जैविक सच्चाई को नहीं मान रही। कुछ ने इसे “विज्ञान पर हमला” कहा।
दूसरी ओर, लिबरल पक्ष का कहना है कि डॉ. वर्मा ट्रांसजेंडर मरीजों (जो जैविक रूप से महिला हैं लेकिन खुद को पुरुष मानते हैं) की वास्तविकता को शामिल कर रही थीं, क्योंकि ऐसे लोग गर्भवती हो सकते हैं। मदर जोन्स जैसे मीडिया ने इसे हॉले की “ट्रांसफोबिया” करार दिया।

ताजा स्थिति
गुरुवार दोपहर तक यह क्लिप ट्रेंडिंग है और दोनों पक्षों से पोस्ट्स की बाढ़ आ रही है। सुनवाई में अन्य गवाहों ने भी एबॉर्शन ड्रग्स पर बहस की, लेकिन यह हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चित रहा। रिपब्लिकन इसे महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स राजनीतिक प्रतिबंधों को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बता रहे हैं।

यह बहस अमेरिका में जेंडर आइडेंटिटी, एबॉर्शन राइट्स और विज्ञान vs राजनीति के बड़े मुद्दे को फिर से उजागर कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक रूप से गर्भधारण केवल महिलाओं (या ट्रांस पुरुषों) में ही संभव है, लेकिन भाषा और समावेशिता का सवाल विवादास्पद बना हुआ है।

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