नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में रहने वाले लोग हर महीने मेंटेनेंस के नाम पर हजारों रुपये खर्च करते हैं। दावा किया जाता है कि इस रकम से सोसाइटी की सुरक्षा, साफ-सफाई, लिफ्ट, बिजली, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं का रखरखाव किया जाता है। लेकिन जब बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा पर ही सवाल उठने लगें, तो मेंटेनेंस के नाम पर वसूली जाने वाली रकम के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
ताजा जानकारी के मुताबिक, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की विभिन्न ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, मॉल और अन्य इमारतों में लगी लिफ्टों की व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आई हैं। कुल 23 सोसाइटियों में लिफ्ट सुरक्षा और रखरखाव से संबंधित मानकों के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिलने की बात सामने आई है। कहीं लिफ्ट ऑपरेटर और टावर गार्ड तैनात नहीं मिले, तो कहीं कई लिफ्ट बंद पाई गईं। कुछ जगहों पर लिफ्ट की मोटर और रोप के रखरखाव में भी कमियां सामने आई हैं। इन खामियों ने ऊंची इमारतों में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मेंटेनेंस के नाम पर वसूली पूरी, लेकिन लिफ्ट की सुरक्षा अधूरी?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बहुमंजिला इमारतों का जाल फैला हुआ है। इन इमारतों में रहने वाले बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए लिफ्ट कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। कई टावरों में दर्जनों मंजिलें हैं, जहां सीढ़ियों के सहारे आना-जाना आसान नहीं होता।
ऐसे में अगर लिफ्ट बंद पड़ी हो, उसके जरूरी पुर्जों का रखरखाव ठीक से न हो रहा हो या आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए पर्याप्त व्यवस्था न हो, तो यह महज प्रबंधन की छोटी-मोटी चूक नहीं रह जाती। यह सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बन जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सोसाइटी प्रबंधन निवासियों से नियमित रूप से मेंटेनेंस चार्ज वसूलता है, तो लिफ्ट जैसी जरूरी सुविधा के रखरखाव में लापरवाही क्यों दिखाई देती है? क्या रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट खर्च किया जा रहा है? क्या लिफ्टों की नियमित तकनीकी जांच होती है? और यदि जांच में कमियां मिलती हैं, तो उन्हें समय रहते दूर क्यों नहीं किया जाता?
कहीं ऑपरेटर नहीं, कहीं बंद मिलीं लिफ्ट
सामने आई जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई तरह की कमियां देखने को मिलीं। कुछ सोसाइटियों में लिफ्ट ऑपरेटर और टावर गार्ड की तैनाती नहीं थी। वहीं, कुछ जगहों पर कई लिफ्ट बंद मिलीं। इसके अलावा, लिफ्ट की मोटर और रोप के रखरखाव में भी कमियां पाई गईं।
लिफ्ट की मोटर और रोप उसके सुरक्षित संचालन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इनका रखरखाव निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार होना जरूरी है। यदि नियमित जांच और समय पर मरम्मत नहीं होती, तो खराबी का पता देर से चल सकता है और यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, हर इमारत में लिफ्ट ऑपरेटर की अनिवार्यता और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं संबंधित नियमों, लिफ्ट के प्रकार तथा लागू मानकों के आधार पर तय होती हैं। इसलिए प्रत्येक सोसाइटी में मिली कमी का आकलन संबंधित नियमों के अनुसार किया जाना जरूरी है।
क्या हर बार बिजली कटने से ही बीच में रुकती है लिफ्ट?
लिफ्ट में लोगों के फंसने की घटनाओं के बाद अक्सर बिजली कटने को इसकी वजह बताया जाता है। लेकिन तकनीकी तौर पर हर घटना के लिए बिजली आपूर्ति बाधित होना ही जिम्मेदार नहीं होता।
सामान्य परिस्थितियों में बिजली जाने पर आधुनिक लिफ्टों में उपलब्ध ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) या अन्य आपातकालीन व्यवस्था लिफ्ट को नजदीकी मंजिल तक लाने और यात्रियों को बाहर निकलने में मदद कर सकती है। हालांकि, यह सुविधा संबंधित लिफ्ट में लगी प्रणाली, बैकअप और उसकी कार्यशील स्थिति पर निर्भर करती है।
यदि लिफ्ट दो मंजिलों के बीच रुक जाती है, तो इसकी वजह बिजली आपूर्ति में बाधा के अलावा मैकेनिकल खराबी, सेंसर में समस्या, दरवाजे के इंटरलॉक में खराबी, नियंत्रण प्रणाली में गड़बड़ी या अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं। किसी खास घटना की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।
इसलिए लिफ्ट में फंसने की हर घटना को केवल बिजली कटने से जोड़कर देखना उचित नहीं है। जरूरी है कि लिफ्ट की पूरी प्रणाली, आपातकालीन बैकअप और बचाव व्यवस्था की नियमित जांच की जाए।
ऑपरेटर नहीं तो CCTV और इंटरकॉम कितने कारगर?
कुछ इमारतों में लिफ्ट ऑपरेटर की अनुपस्थिति में सीसीटीवी कैमरे, इंटरकॉम और दूसरे संचार माध्यम यात्रियों की निगरानी तथा आपातकालीन मदद के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये व्यवस्थाएं वास्तव में काम कर रही हैं?
यदि लिफ्ट में कोई व्यक्ति फंस जाए और इंटरकॉम काम न करे, तो वह मदद के लिए किससे संपर्क करेगा? यदि सीसीटीवी कैमरे लगे हों, लेकिन उनकी निगरानी के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति न हो, तो आपात स्थिति में सहायता पहुंचने में देरी हो सकती है।
सिर्फ कैमरे और इंटरकॉम लगा देना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि उपकरण चालू हालत में हों, अलार्म और आपातकालीन संचार व्यवस्था की जांच होती रहे और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। जहां नियमों के तहत विशेष ऑपरेटर या अन्य व्यवस्था अनिवार्य हो, वहां वैकल्पिक इंतजाम उसके स्थान पर स्वतः पर्याप्त नहीं माने जा सकते।
सोसाइटी प्रबंधन की जवाबदेही कौन तय करेगा?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए लिफ्ट सुरक्षा रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा है। इसके बावजूद यदि निरीक्षण के दौरान एक साथ कई सोसाइटियों में कमियां सामने आती हैं, तो संबंधित प्रबंधन और रखरखाव एजेंसियों की जवाबदेही तय करना जरूरी हो जाता है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने कई अहम सवाल हैं:
- जिन 23 सोसाइटियों में खामियां मिलीं, क्या उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं?
- क्या सभी कमियों को दूर करने के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है?
- क्या लिफ्टों की मोटर, रोप, ब्रेक और आपातकालीन प्रणाली की तकनीकी जांच कराई जा रही है?
- क्या बंद पड़ी लिफ्टों को सुरक्षा जांच के बाद ही दोबारा चालू किया जाएगा?
- क्या सीसीटीवी, इंटरकॉम, अलार्म और आपातकालीन बचाव व्यवस्था की कार्यशीलता की भी जांच होगी?
- यदि किसी सोसाइटी में लापरवाही दोबारा सामने आती है, तो जिम्मेदार प्रबंधन या रखरखाव एजेंसी पर क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, ताकि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए और लोगों को सुरक्षित सुविधाएं मिल सकें।
लिफ्ट इस्तेमाल करते समय निवासी किन बातों का रखें ध्यान?
लिफ्ट का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना यात्रियों के लिए मददगार हो सकता है।
- लिफ्ट के अंदर आपातकालीन अलार्म और इंटरकॉम की उपलब्धता देखें।
- लिफ्ट में क्षमता से अधिक लोगों के प्रवेश से बचें और ओवरलोड संकेत को नजरअंदाज न करें।
- लिफ्ट असामान्य आवाज करे, झटके दे या उसके दरवाजे ठीक से काम न करें, तो सोसाइटी प्रबंधन को सूचना दें।
- लिफ्ट बीच में रुक जाए, तो घबराएं नहीं। अलार्म या इंटरकॉम से संपर्क करें और प्रशिक्षित बचावकर्मियों की मदद लें।
- लिफ्ट में फंसने पर जबरन दरवाजा खोलने या खुद बाहर निकलने की कोशिश न करें। इससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
- सोसाइटी प्रबंधन से लिफ्ट के रखरखाव, तकनीकी जांच और आपातकालीन बचाव व्यवस्था की जानकारी मांगें।
अब मेंटेनेंस चार्ज के बदले सुरक्षित सुविधाओं की जवाबदेही जरूरी
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट खरीदने के लिए लोग अपनी जीवनभर की कमाई लगा देते हैं। इसके बाद हर महीने मेंटेनेंस के नाम पर अलग से रकम चुकाते हैं। ऐसे में उनसे यह अपेक्षा करना गलत नहीं कि सोसाइटी की बुनियादी सुविधाएं सुरक्षित और चालू हालत में रहें।
23 सोसाइटियों में लिफ्ट संबंधी कमियां सामने आने की जानकारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मेंटेनेंस के नाम पर वसूली जाने वाली रकम का इस्तेमाल सुविधाओं के वास्तविक रखरखाव में हो रहा है? इसका जवाब संबंधित सोसाइटी प्रबंधन, रखरखाव एजेंसियों और जिम्मेदार विभागों को देना चाहिए।
लिफ्ट की सुरक्षा कोई लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत है। जब लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही इसी पर निर्भर हो, तो लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अब जरूरी है कि सामने आई कमियों को दूर करने के साथ-साथ नियमित निरीक्षण, तकनीकी जांच और आपातकालीन व्यवस्थाओं को भी प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने की नौबत ही न आए।

