नोएडा। एनआरआई हाउसिंग लोन में कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। विदेश में रहने वाले भारतीयों यानी नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हाउसिंग लोन हासिल करने के मामले में ईडी ने नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में कुल 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच के दायरे में अंतरिक्ष प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सनशाइन इन्फ्रावेल प्राइवेट लिमिटेड के नाम सामने आए हैं। नोएडा में बिल्डर हरेंद्र यादव से जुड़े परिसरों पर भी ईडी और आयकर विभाग की संयुक्त कार्रवाई की खबर सामने आई है।
कौन हैं हरेंद्र यादव, जिनके ठिकानों पर पहुंची ईडी?
हरेंद्र यादव नोएडा के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े बिल्डर हैं। उनका नाम अंतरिक्ष बिल्डर्स और सनशाइन इन्फ्रावेल से संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग में सामने आया है। अक्टूबर 2026 में एनआरआई हाउसिंग लोन से जुड़े कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच के दौरान वह केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के केंद्र में रहे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-44 स्थित पर्ल गेटवे सोसाइटी के टावर-के में हरेंद्र यादव से जुड़े ठिकानों पर ईडी और आयकर विभाग की टीमों ने तलाशी ली। रिपोर्टों में कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रहने की जानकारी दी गई थी। जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और लेनदेन की पड़ताल कर रही थीं। हालांकि, तलाशी में बरामद सामग्री और हरेंद्र यादव की व्यक्तिगत भूमिका के संबंध में अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुए थे।
क्या है NRI हाउसिंग लोन घोटाले का मामला?
जांच का मुख्य बिंदु कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अनिवासी भारतीयों के नाम पर हाउसिंग लोन हासिल करना है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि किन दस्तावेजों और पहचान संबंधी विवरणों के आधार पर ऋण लिए गए, किन बैंकों से रकम स्वीकृत कराई गई और इस धन का इस्तेमाल कहां किया गया।
मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है। इसका उद्देश्य कथित अपराध से प्राप्त धन की पहचान करना और यह पता लगाना है कि इसमें संबंधित कंपनियों, प्रमोटरों तथा अन्य व्यक्तियों की क्या भूमिका रही। फिलहाल जांच में सामने आए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।
अंतरिक्ष प्रमोटर्स और सनशाइन इन्फ्रावेल पर क्यों है नजर?
ईडी की कार्रवाई में शामिल दो कंपनियां नोएडा के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ी हैं। एजेंसी इनसे संबंधित परिसरों और लोगों के बीच वित्तीय संबंधों की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित लोन धोखाधड़ी में कंपनियों की क्या भूमिका थी और क्या ऋण के जरिए प्राप्त रकम का किसी अन्य संपत्ति या कारोबार में इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, किसी कंपनी का जांच के दायरे में आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
पहले भी विवादों में आ चुके हैं हरेंद्र यादव
हरेंद्र यादव का नाम इससे पहले भी नोएडा में दर्ज मामलों को लेकर खबरों में रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर 2024 में नोएडा पुलिस ने एक हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों से बिजली और मेंटेनेंस के नाम पर रकम लेने तथा बिजली विभाग को भुगतान नहीं किए जाने से जुड़े कथित गबन के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था।
इसके अलावा, अक्टूबर 2026 में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लैट की बिक्री और उस पर पहले से लिए गए बैंक ऋण को लेकर हरेंद्र यादव समेत कुछ लोगों के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-24 थाने में एक और एफआईआर दर्ज हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक फ्लैट का कब्जा दिए जाने से पहले ही उसे गिरवी रखकर IDFC First Bank से 1.90 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों को लेकर भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और कानूनी निर्धारण जांच के अधीन है।
नोएडा के बिल्डरों पर ईडी की कार्रवाई से बढ़ी चिंता
एनआरआई लोन मामले में कई शहरों में एक साथ तलाशी और नोएडा में बिल्डरों से जुड़े परिसरों की जांच ने रियल एस्टेट सेक्टर में सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा है, किन लोगों की भूमिका सामने आती है और बैंकों को कितना नुकसान हुआ।
फिलहाल ईडी की जांच का केंद्र कथित फर्जी हाउसिंग लोन, संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और धन के संभावित प्रवाह का पता लगाना है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी के आधिकारिक खुलासों से इस मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।
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