नई दिल्ली, भारत की तेजी से बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए देश को पहले से तय योजना से कहीं अधिक कोयला आधारित बिजली क्षमता जोड़नी पड़ सकती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने मंगलवार को यह बात कही। पिछले साल भारत ने 2035 तक कोयला आधारित क्षमता को 307 गीगावॉट तक पहुंचाने के लिए 97 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ने की योजना बनाई थी। वर्तमान में देश की कोयला आधारित क्षमता करीब 230 गीगावॉट है। प्रसाद ने कहा, “अब शायद यह 105 गीगावॉट या यहां तक कि 150 गीगावॉट तक पहुंच सकता है।” उन्होंने भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “मांग बढ़ रही है और मांग बढ़ने के साथ हमें इस मांग को पूरा करने के लिए स्थिर आपूर्ति संसाधनों की जरूरत है।”
इस साल दैनिक पीक बिजली मांग पिछले साल के मुकाबले 45 से 50 गीगावॉट अधिक चल रही है। कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन घटा है, जिससे थर्मल प्लांट्स पर निर्भरता बढ़ गई है। सितंबर में बिजली की कमी 56 करोड़ यूनिट (560 मिलियन किलोवॉट-आवर) तक पहुंच गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक है। इसी दौरान कोयला आधारित उत्पादन में 13.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जलविद्युत उत्पादन में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
प्रसाद ने साफ किया कि कोयला क्षमता बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा विकास को धीमा कर रहा है। देश अक्षय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के लिए कोयले पर निर्भरता बनी हुई है। यह बयान उन चुनौतियों को रेखांकित करता है, जिनका सामना भारत को ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाते हुए करना पड़ रहा है।
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