नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत, जिन पर जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है, को सोमवार (5 अक्टूबर 2026) को अतिरिक्त उप आयुक्त (एडिशनल डीसीपी) के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। उनके साथ 11 अन्य अधिकारियों को भी यह पद मिला।
2018 बैच के डेनिक्स (DANIPS) अधिकारी विवेक भगत कनॉट प्लेस में एसीपी के रूप में तैनात थे। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के आदेश के तहत 12 चयन ग्रेड डेनिक्स अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का वर्तमान ड्यूटी चार्ज सौंपा गया। इनमें डॉ. विकास शियोकांद, ए. वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, साकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, आशीष कुमार, मनीष लादला, रोहित गुप्ता और विवेक भगत शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये प्रमोशन नियमित प्रक्रिया का हिस्सा थे और इनके प्रस्ताव आरोप सामने आने से काफी पहले भेजे जा चुके थे।
क्या हैं आरोप?
3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इनमें से एक स्वतंत्र पत्रकार (रोजी) ने आरोप लगाया कि जब वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत की कवरेज कर रही थीं, तो उन्होंने एसीपी विवेक भगत से महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा। इसके जवाब में भगत ने कथित तौर पर उन्हें अनुचित तरीके से छुआ (सीने पर हाथ मारा) और धक्का दिया। दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि नई दिल्ली जिले को तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें मिली हैं और इन्हें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
पत्रकारों और विपक्ष का विरोध
पत्रकारों ने संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने भगत के निलंबन और एफआईआर की मांग की। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा और कहा कि पुलिस का बुनियादी कर्तव्य एफआईआर दर्ज करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कैमरे छीने गए और पत्रकारों को घसीटा गया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार पर सदमा व्यक्त किया और शिकायतों पर कार्रवाई की अपील की। एआईएसए ने भी पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ के आरोप लगाए।
पुलिस का रुख
दिल्ली पुलिस ने मीडिया एडवाइजरी जारी कर पत्रकारों से वैध संगठनात्मक पहचान पत्र या पीआईबी/डीआईपी एक्रेडिटेशन कार्ड साथ रखने और स्पष्ट रूप से दिखाने को कहा है। पुलिस ने कहा कि कुछ डिजिटल पत्रकार कर्मियों को घेरकर और माइक्रोफोन पास करके उनके काम में बाधा डाल रहे थे। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कुछ आरोपों को “निराधार और भ्रामक” बताया।
यह प्रमोशन उस समय हुआ जब आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच में चल रही है और पत्रकार समुदाय तथा विपक्ष लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मामले की आगे की जांच और संभावित एफआईआर का इंतजार है।
यह भी पढ़ें: चलती XUV कार बनी आग का गोला, चालक ने कूदकर बचाई जान; शॉर्ट सर्किट की आशंका

