नोएडा, शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने निर्माण स्थलों पर शिकंजा कस दिया है। सेक्टर-115 में बन रहे आईवरी काउंटी प्रोजेक्ट में प्रदूषण रोकने के इंतजामों में कई खामियां मिलने पर बोर्ड ने उस पर 50 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है।
चार दिन से बढ़ रहा था AQI
बोर्ड के मुताबिक सेक्टर-116 का एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले करीब चार दिनों से बढ़ रहा था। केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से 29 सितंबर को जारी ग्रैप शेड्यूल में भी यहां की हवा ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में दर्ज थी। इसके बाद आसपास चल रहे निर्माण कार्यों की जांच शुरू की गई।
निरीक्षण में क्या मिला
बोर्ड की टीम ने 5 अक्टूबर को प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। यह प्रोजेक्ट सेक्टर-116 के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन से करीब 750 मीटर दूर है। जांच के दौरान प्रोजेक्ट की ओर से डीजीएम विनोद कुमार सहानी मौजूद थे। रिपोर्ट में ये खामियां दर्ज की गईं:
निर्माण सामग्री, मिट्टी और मलबा खुले में पड़ा था और उसे ढकने की कोई व्यवस्था नहीं थी। धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव नहीं हो रहा था। प्रोजेक्ट के भीतर और बाहर आने-जाने वाले रास्तों पर काफी धूल थी, जो वाहनों की आवाजाही से उड़ रही थी। निर्माणाधीन बिल्डिंग पर ग्रीन नेट नहीं लगा था और स्प्रे गन से खुले में पेंट का काम चल रहा था। चारों तरफ लगी विंडब्रेकिंग वॉल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। परिसर में दो एंटी स्मॉग गन लगी थीं, लेकिन दोनों बंद मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें मानकों के हिसाब से स्थापित भी नहीं किया गया था।
रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, आईवरी काउंटी एम्बाइंसी प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना है और नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय की रिपोर्ट मुख्य पर्यावरण अधिकारी (वृत्त-1), यूपीपीसीबी, लखनऊ को भेजी गई है।
बोर्ड के हाथ मजबूत
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बोर्ड की शक्तियां बढ़ी हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने यूपीपीसीबी को जुर्माना लगाने के साथ उसे सीधे वसूलने का अधिकार भी दे दिया है। इससे पहले वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण जैसी स्थानीय संस्थाओं पर निर्भर रहने के कारण पिछले नौ वर्षों में करीब 35 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली नहीं हो सकी थी।
क्यों अहम है यह कार्रवाई
अक्टूबर में ग्रैप लागू होने के साथ निर्माण स्थलों के लिए धूल नियंत्रण के नियम सख्त हो जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास के प्रोजेक्ट सबसे पहले जांच के दायरे में आते हैं। अन्य निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए भी यह साफ संदेश है कि नियमों की अनदेखी पर भारी आर्थिक दंड लग सकता है।
यह भी पढ़ें: गाजियाबाद साहिबाबाद में रावण के पुतले में धमाका, 5 घायल

