श्रीनगर, 28 सितंबर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द लौटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास कर दिया। प्रस्ताव पर मतदान के दौरान मुख्य विपक्षी दल BJP के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
शुक्रवार को पेश हुआ था प्रस्ताव
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को सदन में रखा था, लेकिन कई सदस्य इस पर बोलना चाहते थे, इसलिए उस दिन इसे टाल दिया गया था। प्रश्नकाल के बाद प्रस्ताव पेश किए जाने के दौरान भी सदन में शोरगुल और BJP सदस्यों का विरोध देखने को मिला था।
BJP का हंगामा
BJP ने शुक्रवार के साथ सोमवार को भी प्रस्ताव का विरोध किया। पार्टी विधायक वेल में पहुंच गए, कार्यवाही के कागज फाड़े और सदन में प्रतीकात्मक (मॉक) कार्यवाही भी चलाई। BJP का कहना है कि प्रस्ताव में स्वायत्तता और विशेष दर्जे का जिक्र संविधान का अपमान है, इसलिए वह न इस पर चर्चा होने देगी और न इसे पारित होने देगी। पार्टी विधायकों ने खास तौर पर 5 अगस्त 2019 से पहले के राज्य के दर्जे के संदर्भों पर आपत्ति जताई।
संशोधनों पर बनी सहमति
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायकों की ओर से 10 संशोधन दिए गए थे, जिनमें से आठ में अगस्त 2019 से पहले वाले विशेष दर्जे की बहाली को भी शामिल करने की मांग थी। मुख्यमंत्री की अपील के बाद अध्यक्ष ने पूछा कि क्या सदस्य अपने संशोधन पर जोर नहीं देना चाहते। सभी आठ विधायक इस पर सहमत हो गए। इसके बाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
प्रस्ताव में क्या कहा गया
प्रस्ताव में कहा गया है कि 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन में पारित प्रस्तावों के अलावा, सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और तुरंत बहाल करने का आग्रह करता है। साथ ही प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का फैसला भी लिया गया। गौरतलब है कि 26 जून 2000 का प्रस्ताव फारूक अब्दुल्ला सरकार के समय पारित हुआ था और स्वायत्तता बहाली से जुड़ा था। 6 नवंबर 2024 का प्रस्ताव 2024 के चुनाव के बाद पहले सत्र में पारित हुआ था और विशेष दर्जे व संवैधानिक गारंटियों से जुड़ा था।
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र को याद दिलाए वादे
प्रस्ताव पेश करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि इसका मकसद केंद्र को पूर्ण राज्य बहाल करने की उसकी प्रतिबद्धता याद दिलाना है, जिसमें कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जनता को बताया गया था कि पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल होगा। परिसीमन और विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जबकि राज्य के दर्जे की बहाली अब भी लंबित है।
अगस्त 2019 से केंद्र शासित प्रदेश
जम्मू-कश्मीर अगस्त 2019 में केंद्र की BJP सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य को जम्मू-कश्मीर व लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद से UT बना हुआ है। अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद से राज्य के दर्जे की बहाली उमर अब्दुल्ला सरकार की प्रमुख मांग रही है।
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