जीबीयू छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की नई अर्जी, क्या है पूरा मामला?

नोएडा/नई दिल्ली। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के द्वितीय वर्ष के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) प्रदर्शन से जुड़े 5 लाख रुपये के निजी बांड नोटिस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में अदालत को कार्रवाई के संबंध में गलत जानकारी दी।

अक्षत की याचिका का उल्लेख 10 सितंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष हुआ था। उस दिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की ओर से कोर्ट को बताया था कि नोटिस जिलाधिकारी ने जारी नहीं किया था, बल्कि किसी अन्य अधिकारी ने जारी किया था और संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

नई अर्जी में अक्षत ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी डीजीपी मुख्यालय ने बाद में स्पष्ट किया कि नोटिस का आधार बनने वाली रिपोर्ट तैयार करने वाले सब-इंस्पेक्टर शिव पांडेय को निलंबित किया गया है। नोटिस जारी करने वाले एसीपी (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) को निलंबित नहीं किया गया। अक्षत ने अपनी अर्जी में कहा है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कार्रवाई को लेकर गलत बयान रखा। उनका कहना है कि बाद की यह जानकारी मामले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर संबंधित आधिकारिक दस्तावेज भी कोर्ट के रिकॉर्ड पर रखने की बात कही है। अर्जी अधिवक्ता सुभाष चंद्रन केआर के माध्यम से दाखिल की गई है।

क्या था पूरा मामला?

अक्षत को 4 सितंबर 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसमें उन्हें धारा 126 और 135 के तहत 5 लाख रुपये का निजी बांड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वे छात्रों को प्रस्तावित सीजेपी धरने में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे और सरकार विरोधी बातें फैला रहे थे। नोटिस बाद में वापस ले लिया गया था।

यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के उस आदेश के तीन दिन बाद जारी हुआ था, जिसमें सीजेपी से जुड़े जुलाई के प्रदर्शनों (जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ) में शामिल छात्रों के खिलाफ मामलों को रद्द कर राहत दी गई थी। गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुछ लोगों को छोड़कर छात्रों पर आगे कोई जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश था। 9 सितंबर की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने भी सवाल किया था कि जब कोर्ट पहले ही कार्रवाई को रद्द कर चुका है तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी किया।

अक्षत मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और जीबीयू से बीए-एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उस समय विश्वविद्यालय परिसर में नहीं थे। मामले में पहले एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के निलंबन की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में डीजीपी मुख्यालय की सफाई से स्थिति अलग बताई गई। अक्षत की नई अर्जी इसी विसंगति को लेकर है। मामला आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

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