नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट करीब 108.96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जबकि पूरे सप्ताह इसकी कीमत में करीब 13 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। यह कई महीनों का ऊंचा स्तर है।
कच्चे तेल की इस तेजी ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी भारत के लिए लागत बढ़ा सकती है। शुक्रवार को रुपये पर भी दबाव देखा गया और तेल की बढ़ती कीमतों को इसकी प्रमुख वजहों में शामिल किया गया।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव
अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, लगातार महंगे होते कच्चे तेल ने सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव डाल दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक तेल कंपनियों को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पेट्रोल में करीब 5 रुपये और डीजल में करीब 23 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है।
यही वजह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक 110 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बना रहता है, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार तेजी तेल कंपनियों के लिए लंबे समय तक सहना मुश्किल हो सकता है।
महंगा डीजल बढ़ा सकता है आम आदमी का खर्च
डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों की जेब तक सीमित नहीं रहता। ट्रक, बस और दूसरे मालवाहक वाहनों की लागत बढ़ने पर फल-सब्जी, दूध, अनाज और अन्य सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका सीधा असर बाजार में सामान की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
इसके अलावा विमानन, लॉजिस्टिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों की लागत भी ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होती है। इसलिए कच्चे तेल में जारी तेजी को अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया का तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम
तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता है। रिपोर्टों के अनुसार लाल सागर क्षेत्र में घटनाक्रम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास तेल आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ने से बाजार में आशंका मजबूत हुई है।
अगर संघर्ष और बढ़ता है तथा तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं। कुछ बाजार विश्लेषकों ने संघर्ष बढ़ने की स्थिति में ब्रेंट के 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने का जोखिम भी जताया है।
लोग अभी से रहें सावधान
फिलहाल आम लोगों को घबराकर पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक भंडारण करने की जरूरत नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल की तत्काल कमी की कोई बात सामने नहीं आई है। लेकिन लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दाम भविष्य में ईंधन महंगा होने का दबाव जरूर बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में वाहन चालकों को अनावश्यक यात्राओं और ईंधन की बर्बादी से बचने की कोशिश करनी चाहिए। खासकर कारोबारी और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को आने वाले दिनों में ईंधन लागत पर नजर रखनी होगी। अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 110 डॉलर के ऊपर बना रहता है तो इसका असर आखिरकार भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।
यह भी पढ़ें: 263 युवतियों को मिली नौकरी, 17 कंपनियों ने लिया हिस्सा

