दिल्ली पीजी हादसा: 7 मौतों के बाद MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड, मालिक हरिराम गुप्ता राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक निजी हॉस्टल की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक दिन बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम (MCD) के दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड, जांच शुरू

MCD के विजिलेंस विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर को डीएमसी सर्विसेज (कंट्रोल एंड अपील) रेगुलेशन, 1959 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर डिप्टी कमिश्नर के अलावा एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को भी निलंबित किया गया है। यह मामला अभी विकसित हो रहा है और आगे की जानकारी लगातार सामने आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि जिस पांच मंजिला इमारत में यह पीजी हॉस्टल—’हॉस्टल डेज़’—चल रहा था, वह ढहने से सात लोगों की जान चली गई थी।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को ढही पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता को सोमवार को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार, घटना के 24 घंटे से अधिक समय बाद व्यापक तलाशी अभियान के दौरान हरिराम गुप्ता को भिवाड़ी से दबोचा गया। वे गुरुग्राम के निवासी बताए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ साउथ कैंपस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी। इनमें गैर-इरादतन हत्या, इमारत की मरम्मत या निर्माण में लापरवाही और जान को खतरे में डालने संबंधी धाराएं शामिल हैं।

हादसे वाली जगह के पास रहने वाली छात्रा ने सुनाई दहशत की रात

घटनास्थल से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित एक पीजी में रहने वाली छात्रा ने बताया कि हादसे के बाद की रात उसके लिए बेहद डरावनी और नींद रहित रही। बिहार की रहने वाली यह छात्रा श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई करती है और करीब दो महीने पहले ही सत्य निकेतन में शिफ्ट हुई थी। टीवी चैनलों से बातचीत में उसने बताया कि वह बेहद डरी हुई है और उसके माता-पिता भी हादसे की खबर सुनकर काफी चिंतित हैं। रातभर बचाव अभियान चलता रहा, एंबुलेंस, दिल्ली पुलिस और NDRF की टीमें इलाके में आती-जाती रहीं, जिससे वह ठीक से सो नहीं पाई। उसने बताया कि कई छात्र रातभर जागते रहे और अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर यह देखते रहे कि कहीं उनकी अपनी इमारत को भी कोई खतरा तो नहीं।

“क्या हमारी बिल्डिंग भी अगली है?”

छात्रा ने बताया कि इलाके की तंग गलियां और सटी हुई इमारतें उसकी चिंता का बड़ा कारण हैं। अपनी बालकनी से नजर आने वाले दृश्य का जिक्र करते हुए उसने बताया कि पड़ोसी इमारतों के बीच बेहद कम जगह है, बिजली के तार आपस में उलझे हुए हैं, और एसी यूनिट्स तथा पाइप इमारतों से बाहर की ओर लटके नजर आते हैं। उसके मुताबिक इमारतें लगभग दीवार से दीवार सटी हुई हैं, जिससे किसी आपात स्थिति में निकलने के लिए बहुत कम जगह बचती है। उसने यह भी बताया कि उसकी रूममेट, जिसकी परीक्षा नजदीक थी, बिजली न होने और माहौल में फैली चिंता के चलते पढ़ाई के लिए कमरा छोड़कर कहीं और चली गई।

महंगे किराए, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

छात्रा ने यह सवाल भी उठाया कि इतना महंगा किराया देने के बावजूद छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पातीं। उसके अनुसार, सत्य निकेतन में पीजी का किराया 15 हजार से 20 हजार रुपये तक है, लेकिन कई कमरों में बिजली, जगह और हवादार व्यवस्था की भारी कमी है। कई जगह दो-दो छात्रों को बेहद तंग कमरों में साथ रहना पड़ता है। उसने बताया कि हादसे का शिकार हुआ ‘हॉस्टल डेज़’ इलाके में छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय था और बैनर-होर्डिंग्स के जरिए उसका खूब प्रचार भी किया जाता था।

अभिभावक भी चिंतित

दरभंगा, बिहार की रहने वाली इस छात्रा ने बताया कि उसके माता-पिता बार-बार फोन करके उसकी सुरक्षा को लेकर पूछते रहते हैं। उसने कहा कि छात्र यहां पढ़ाई और भविष्य बनाने के लिए आते हैं, और उनके परिवार उम्मीदों के साथ उन्हें भेजते हैं, लेकिन उन्हें भी यह भरोसा चाहिए कि उनके बच्चे सुरक्षित माहौल में रह रहे हैं। छात्रा ने प्रशासन से मांग की कि पीजी और हॉस्टल जैसी छात्र आवासीय सुविधाओं के लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि इतना पैसा चुकाने के बावजूद छात्रों को असुरक्षित हालात में न रहना पड़े।

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