नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता की “खोपड़ी फोड़ने” का दावा करने वाले हिंदुत्व एक्टिविस्ट व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया।
शुक्रवार को बुलंदशहर से हुई थी हिरासत
भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था। इससे पहले CJP प्रतिनिधियों, नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और लोकसभा सांसद पप्पू यादव ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर पुलिस अधिकारियों से भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन इससे पहले ही भारद्वाज को धामेड़ा नारा गांव के पास से बुलंदशहर से भागने की कोशिश करते समय पकड़ लिया गया। पुलिस के अनुसार, भारद्वाज नैथला गांव से बुलेट मोटरसाइकिल पर खुर्जा की ओर भाग निकले थे और पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहने हुए थे।
पॉडकास्ट में की थी हमले की डींग
विवाद तब शुरू हुआ जब भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे यह दावा करते नजर आए कि उन्होंने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए CJP आंदोलन के दौरान नाबालिग छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार का “सिर फोड़ दिया” था। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि राजनीतिक संपर्कों के चलते उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वीडियो में उन्होंने कहा था कि यह अपराध धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत आता है, फिर भी उन्हें जेल नहीं भेजा गया और वे रातभर खुले घूमते रहे। खुद को इंस्टाग्राम बायो में ‘स्वतंत्र सनातनी योद्धा’ बताने वाले भारद्वाज ने बाद में दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया था।
नाबालिग बेटी को मिलीं धमकियां, POCSO के तहत नया केस दर्ज
मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित संजय कुमार की नाबालिग बेटी ने शिकायत दर्ज कराने के बाद ऑनलाइन गंभीर धमकियां और उत्पीड़न झेलने का आरोप लगाया। पुलिस ने इस पर पॉक्सो एक्ट के तहत एक अलग FIR दर्ज की है, साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3), पीछा करने से जुड़ी धारा 78, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़ी धारा 79 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी जोड़ी गई है। CJP प्रतिनिधिमंडल ने मूल मामले में हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट) की धाराएं जोड़ने की मांग भी की थी।
राजनीतिक रंग भी ले चुका है मामला
भारद्वाज के राजनीतिक संबंधों को लेकर किए गए दावों के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में भी तब्दील हो गया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुछ नेताओं, जिनमें चिराग पासवान और कपिल मिश्रा का नाम शामिल है, से जुड़े होने का जिक्र किया था, हालांकि संबंधित नेताओं और पार्टियों ने इन दावों को खारिज करते हुए खुद को इनसे अलग बताया। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी भारद्वाज के खिलाफ झूठे दावों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

