Toxic Movie Review: यश और निर्देशक गीतु मोहनदास की बहुप्रतीक्षित गैंगस्टर ड्रामा ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ आखिरकार कई बार टलने के बाद सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। लगभग 800 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट और यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी स्टार कास्ट के बावजूद, फिल्म को समीक्षकों से मिश्रित से लेकर निराशाजनक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।
कहानी और निर्देशन
फिल्म राया (यश) और उसकी बहन गंगा (नयनतारा) की कहानी है, जो बचपन में अपने माता-पिता से धोखा खाकर अंडरवर्ल्ड की दुनिया में उतर जाते हैं। ‘मूथोन’ और ‘लायर्स डाइस’ जैसी फिल्मों के लिए जानी जाने वालीं गीतु मोहनदास ने यश के साथ मिलकर स्क्रिप्ट लिखी है, और फिल्म को गैंगस्टर की ‘अजेय मिथक’ को तोड़ने वाले एक प्रयोगात्मक, किरदार-केंद्रित नज़रिए से बनाने की कोशिश की गई है।
एडिटिंग बनी सबसे बड़ी शिकायत
लगभग हर बड़े रिव्यू में एक बात समान रूप से उभरकर आई है — फिल्म की एडिटिंग। आउटलुक इंडिया की समीक्षा में उज्ज्वल कुलकर्णी की तेज़ और अस्त-व्यस्त एडिटिंग को भावनात्मक असर और माहौल को लगातार कमजोर करने वाला बताया गया है। समीक्षक ने इसे पिता-पुत्रों, भाई-बहनों और पति-पत्नियों की एक उलझी हुई गाथा करार दिया।
एम9 न्यूज़ की समीक्षा में कहा गया कि राजीव रवि की सिनेमैटोग्राफी भव्य और प्रभावशाली है, लेकिन उज्ज्वल कुलकर्णी की एडिटिंग फिल्म की बड़ी कमज़ोरी है लगभग तीन घंटे की यह फिल्म खिंची हुई महसूस होती है और इसे कहीं ज़्यादा कसावट की ज़रूरत थी। द वीक की समीक्षा में भी फिल्म की अपरंपरागत कहानी कहने की शैली और एडिटिंग के चुनावों को इसे संभावित रूप से बिखरा हुआ और ध्रुवीकरण करने वाला अनुभव बताया गया, जो हर दर्शक वर्ग को पसंद न आए।
लेखन और प्रदर्शन पर भी सवाल
गुल्टे की समीक्षा में फिल्म को स्टाइल में भारी लेकिन कंटेंट में खाली बताया गया, जिसकी कहानी KGF से मिलती-जुलती लगी, बस बैकड्रॉप अलग था भावनाएं दर्शकों तक नहीं पहुंच पातीं। टेलुगुवन की समीक्षा के अनुसार फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है, लेकिन लेखन और क्रियान्वयन उस स्तर तक नहीं पहुंच पाते, जिससे फिल्म कुल मिलाकर एक मिसफायर साबित होती है। हालांकि, हर समीक्षा पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। द वीक की समीक्षा में फिल्म की साहसिक महत्वाकांक्षा और एक दमदार आखिरी अंक की सराहना की गई, जो पहले घटी घटनाओं को नए नज़रिए से पेश करता है।
निष्कर्ष
एक ऐसे दौर में जब यश KGF फ्रैंचाइज़ी की भारी सफलता के बाद चार साल के अंतराल पर बड़े पर्दे पर लौटे हैं, ‘टॉक्सिक’ को उनके करियर की एक बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। फिल्म की भव्यता, सिनेमैटोग्राफी और यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ हो रही है, लेकिन ओवर-स्टफ्ड नैरेटिव और तेज़-रफ़्तार एडिटिंग को लेकर समीक्षकों की राय लगभग एकमत नज़र आती है — फिल्म की क्षमता अफरा-तफरी भरी एडिटिंग के नीचे दबकर रह गई है।
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