Auto-taxis shortage in Mumbai: RTO परीक्षा में मराठी के कठिन सवालों से ड्राइवर परेशान

Auto-taxis shortage in Mumbai: मुंबई। बारिश के मौसम में मुंबई की सड़कों पर टैक्सी और ऑटोरिक्शा मिलना मुश्किल हो गया है। वजह है राज्य सरकार का नया नियम, जिसके तहत कमर्शियल पैसेंजर व्हीकल चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की “कार्यसाधक जानकारी” (working knowledge) अनिवार्य कर दी गई है। इस नियम को सख्ती से लागू करने के विरोध में सोमवार शाम से ऑटोरिक्शा चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे शहर में सवारी ढूंढना और मुश्किल हो गया है।

21 अगस्त से शुरू हुई सख्ती

राज्य के परिवहन विभाग ने महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर मराठी भाषा की जानकारी को अनिवार्य बना दिया है। तीन महीने की छूट अवधि 15 अगस्त को खत्म होने के बाद, 20 अगस्त से पूरे राज्य में जांच अभियान शुरू हुआ। दक्षिण मुंबई से लेकर उत्तरी उपनगरों तक जगह-जगह नाके लगाकर RTO अधिकारी ड्राइवरों से मराठी में बातचीत कर उनकी जानकारी परख रहे हैं। जो ड्राइवर मराठी में जवाब नहीं दे पाते, उन्हें “मेमो” जारी किया जा रहा है। एक महीने के भीतर दोबारा टेस्ट में फेल होने पर उनका लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है, जब तक वे बुनियादी मराठी वाक्य नहीं सीख लेते। यह अभियान 30 सितंबर तक चलेगा।

ड्राइवरों की शिकायत: “पढ़ाया कुछ और गया, पूछा कुछ और जा रहा है”

कांदिवली में टैक्सी चलाने वाले पटना निवासी किसुन यादव के मुताबिक, ड्राइवर मराठी सीखने को तैयार हैं, लेकिन जांच के दौरान पूछे जा रहे सवाल प्रशिक्षण सामग्री से मेल नहीं खाते। मरोल नाका, कांजुरमार्ग, कुर्ला, अंधेरी और गोरेगांव जैसे इलाकों में चले प्रशिक्षण केंद्रों में जो सिखाया गया, जांच में उससे कहीं ज्यादा की उम्मीद की जा रही है। यादव ने बताया कि यह दिक्कत खासतौर पर उम्र में बड़े और कम पढ़े-लिखे ड्राइवरों के लिए ज्यादा गंभीर है। कई ड्राइवर अपनी गाड़ी के मालिक नहीं होते, बल्कि ठेकेदारों के अधीन काम कर रोज की कमाई का हिस्सा देते हैं। ऐसे में रोज का टारगेट पूरा करते हुए नई भाषा सीखना मुश्किल हो जाता है। यादव ने कोंकण साहित्य परिषद द्वारा आयोजित मराठी क्लासों के समय पर भी सवाल उठाया, क्योंकि क्लास अटेंड करने का मतलब है कमाई के घंटे गंवाना। बलिया, उत्तर प्रदेश से आए और बचपन से मुंबई में रह रहे टैक्सी चालक अशोक तिवारी, जिन्होंने स्कूल में ही मराठी सीखी थी, कहते हैं कि उनका अनुभव उन लाखों ड्राइवरों जैसा नहीं है जो बाद में मुंबई आकर बसे। उनकी मुख्य आपत्ति भी यही है कि सवाल प्रशिक्षण सामग्री के दायरे से बाहर के पूछे जा रहे हैं।

टेस्ट में क्या पूछा जाता है?

परिवहन विभाग के मुताबिक, टेस्ट रोजमर्रा की स्थितियों मंज़िल, किराया, रूट, मीटर और CNG स्टॉप जैसी बातचीत पर आधारित है, जो कोंकण साहित्य परिषद के प्रशिक्षण पर आधारित है। लेकिन ड्राइवरों का सवाल है कि आखिर “कार्यसाधक ज्ञान” की परिभाषा क्या है|गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार मुंबई शहर की करीब 36% आबादी की मातृभाषा मराठी है, जो सबसे बड़ा भाषाई समूह है। वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार, मुंबई में बाहर से आने वाले प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत रहे हैं — दोनों राज्यों की हिस्सेदारी करीब 47% है। जनगणना के अनुसार 2001 से 2011 के बीच हिंदी को मातृभाषा बताने वालों की संख्या करीब 40% बढ़ी, जबकि मराठी बताने वालों की संख्या में मामूली गिरावट दर्ज हुई। ड्राइवरों का कहना है कि ज्यादातर यात्री हिंदी समझते और बोलते हैं, और दशकों से यही चलन रहा है।

पहले ही दिन 1,268 ड्राइवरों को नोटिस

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 21 अगस्त को बताया कि जांच के पहले दिन राज्यभर में 8,217 ड्राइवरों की जांच में 1,268 को नोटिस जारी किए गए। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में जांचे गए 3,995 ड्राइवरों में से 604 मराठी की कार्यसाधक जानकारी नहीं रखते पाए गए। सरनाईक ने कहा कि यह कदम सिर्फ नियम पालन का मामला नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि 105 दिन के अभियान में अब तक 1.65 लाख ड्राइवरों को मराठी प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं जबकि राज्य में कुल लाइसेंसधारी ऑटो-टैक्सी चालकों की संख्या करीब 9.65 लाख है। अकेले मुंबई में यह आंकड़ा 4.6 लाख है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि सरकार हिंदी भाषी भाइयों को मराठी का विशेषज्ञ नहीं बनाना चाहती, बल्कि उन्हें भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीखने की समय-सीमा तीन बार बढ़ाई जा चुकी है और महायुति सरकार भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।

MNS को लेकर उत्तर भारतीय ड्राइवरों में डर

उत्तर प्रदेश और बिहार से आए ड्राइवरों को एक और चिंता सता रही है — राज थाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) कार्यकर्ताओं से टकराव का डर। पार्टी का उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक भाषाई राजनीति का पुराना इतिहास रहा है। हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में MNS को एक भी सीट नहीं मिली और उसने लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ा, फिर भी भाषा के मुद्दे पर पार्टी की सक्रियता बनी हुई है। इस साल जनवरी में BMC चुनावों के दौरान उत्तर भारतीय दुकानदारों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई थीं।

बारिश के बीच हड़ताल से यात्री परेशान

सोमवार शाम से शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल और मानसून की बारिश ने मिलकर मुंबईकरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें ऑटो या टैक्सी के लिए 40-50 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा, जिससे दफ्तर पहुंचने में देरी हुई। सोमवार को कांदिवली में ड्राइवरों ने सड़क जाम कर मराठी नियम के सख्त क्रियान्वयन को लेकर उत्पीड़न और धमकियों का आरोप लगाया। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से कोई गुरेज नहीं, बस उन्हें रोज़ी-रोटी और भाषा सीखने के बीच संतुलन बनाने के लिए वाजिब समय और सही प्रशिक्षण चाहिए।

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