Greater Noida News: गौतमबुद्धनगर/नोएडा। दादरी विधानसभा सीट से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का टिकट हासिल करने के प्रयास में जुटी महिला उम्मीदवार कुशल सिंह और उनके पति ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक रवीन्द्र तोंगड़ (तौंगड़) समेत 11 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, गबन और धमकी के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज हो गई है। मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट के 72 हजार वर्गमीटर ग्रुप हाउसिंग भूखंड से जुड़ा है। अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद थाना सेक्टर-20 पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस जांच में जुट गई है।
यह भूखंड सेक्टर-01, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थित प्लॉट संख्या जीएच-11 है। फरवरी 2011 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसे गायत्री हॉस्पिटेलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड को लीज पर आवंटित किया था। लीज डीड के बाद आरोप है कि आरोपियों ने बिना उचित लेन-देन के इस भूखंड के हिस्सों को बेनामी कंपनियों के नाम सब-लीज करा लिया। 2013 में करीब 20 हजार वर्गमीटर भूमि की सब-लीज इन्टाइस्मेंट (या इन्टाइसमेंट) इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम कराई गई। इस कंपनी में पूर्व महाप्रबंधक के रिश्तेदारों को निदेशक बनाया गया और उनकी पत्नी कुशल सिंह को 73 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। 2014 में अतिरिक्त करीब 14 हजार वर्गमीटर भूमि की दूसरी सब-लीज कोमली बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम किए जाने का आरोप है। कुल मिलाकर 34 हजार वर्गमीटर भूमि की सब-लीज में अनियमितता बताई जा रही है।
शिकायतकर्ता गायत्री हॉस्पिटेलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह का आरोप है कि पद के प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन हड़पी गई, मूल कंपनी को निर्धारित भुगतान नहीं किया गया और करोड़ों रुपये का गबन हुआ। परियोजना में फ्लैट बुकिंग शुरू होने के बाद क्षेत्रफल घटाकर 36 हजार वर्गमीटर कर दिया गया। 2015-16 में हिस्सेदारी के लेन-देन के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित किए गए। बाद में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीआरसी ग्रुप के साथ संयुक्त उपक्रम कर नई परियोजना विकसित की गई। बैंक ऋण लेने में भी फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। दिसंबर 2025 में हिसाब-किताब की बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता को धमकी देने और पीछा करने का भी आरोप है।
एफआईआर में रवीन्द्र तोंगड़, कुशल सिंह के अलावा सीआरसी ग्रुप के निदेशक कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग, हिमांशु गोयल समेत कुल 11 नामजद और छह-सात अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, क्योंकि शुरू में थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। एसीपी प्रवीण कुमार सिंह के अनुसार जांच उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। पुलिस भूमि दस्तावेज, सब-लीज रिकॉर्ड, कंपनी अभिलेख और बैंक लेन-देन की गहन जांच कर रही है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुशल सिंह आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (2027) को ध्यान में रखते हुए दादरी सीट से भाजपा टिकट की दावेदार हैं। क्षेत्र में बड़े नेताओं के फोटो वाले पोस्टर लगाकर सक्रियता दिखाई जा रही है। दादरी सीट वर्तमान में भाजपा के पास है और पार्टी के लिए यह महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोप गंभीर हैं और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। यह मामला ग्रेटर नोएडा में भूमि आवंटन और सब-लीज प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का एक और उदाहरण बनकर उभरा है। मूल आवंटी कंपनी का कहना है कि सरकारी राजस्व, बैंक और संभावित फ्लैट खरीदार भी प्रभावित हुए। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

