नोएडा। सेवानिवृत्त विंग कमांडर की मौत के बाद उनकी विरासत को लेकर परिवार में ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि मामला पुलिस और फिर अदालत तक पहुंच गया। बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहन पर माता-पिता की संपत्ति हड़पने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, वसीयत में हेरफेर करने और बैंक खातों व निवेश की रकम निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली एक्सप्रेसवे पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक, मामला सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना अधिकारी प्रभाकर व्यास की संपत्ति से जुड़ा है। शिकायतकर्ता उनकी बड़ी बेटी हैं, जबकि आरोप उनकी छोटी बहन श्रुति पांडेय पर लगाए गए हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।
मई 2026 में हुआ था पिता का निधन
शिकायतकर्ता के अनुसार उनके पिता प्रभाकर व्यास भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद पर सेवाएं दे चुके थे। बीमारी के चलते मई 2026 में उनका निधन हो गया। परिवार के बीच संपत्ति को लेकर विवाद इसके बाद गहराता गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिता की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें 11 मई को अस्पताल से घर लाया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर छोटी बेटी श्रुति पांडेय से खतरा होने की बात कही थी। बड़ी बेटी का दावा है कि उस समय पिता की स्थिति ऐसी थी कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी। हालांकि, पिता द्वारा कथित तौर पर कही गई बात और उस समय की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के दौरान किए जाने वाले साक्ष्यों से होगी।
2018 में दोनों बेटियों के नाम बराबर संपत्ति की वसीयत का दावा
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उनके माता-पिता ने वर्ष 2018 में अपनी संपत्ति दोनों बेटियों के बीच बराबर बांटने की वसीयत तैयार की थी। बड़ी बेटी के मुताबिक, इस वसीयत में दोनों बहनों के हिस्से को स्पष्ट किया गया था।
आरोप है कि बाद में छोटी बेटी ने संपत्ति पर अपना अधिकार बढ़ाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके माता-पिता की संपत्ति को अपने नाम कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
अब पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि वर्ष 2018 में तैयार की गई कथित वसीयत वास्तविक है या नहीं और बाद में संपत्ति से संबंधित कोई दूसरा दस्तावेज किस परिस्थिति में तैयार हुआ।
बैंक खातों और निवेश की रकम निकालने का भी आरोप
संपत्ति विवाद सिर्फ जमीन और मकान तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता ने छोटी बहन पर माता-पिता के बैंक खातों और निवेश से जुड़ी रकम निकालने का भी आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, माता-पिता के बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय संपत्तियों में जमा रकम पर भी दोनों बेटियों का अधिकार होना था। आरोप है कि इनमें से कुछ रकम कथित तौर पर बिना सहमति निकाल ली गई।
पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन खातों से कब और कितनी रकम निकाली गई और उस समय खाते का संचालन किसके द्वारा किया जा रहा था।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
परिवार के स्तर पर विवाद का समाधान नहीं होने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा। शिकायतकर्ता ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली एक्सप्रेसवे पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने अब आरोपों की जांच करने और संबंधित दस्तावेज जुटाने की जिम्मेदारी है। पुलिस संपत्ति के कागजात, वसीयत, बैंक रिकॉर्ड, निवेश से संबंधित दस्तावेज और परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कर सकती है।
फर्जी दस्तावेज की जांच होगी अहम
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कथित फर्जी दस्तावेज हैं। यदि शिकायतकर्ता के आरोपों की जांच में दस्तावेजों में जालसाजी सामने आती है तो यह मामला केवल पारिवारिक संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रहेगा।
पुलिस यह जांच कर सकती है कि विवादित दस्तावेज कब तैयार हुए, उनमें किसकी भूमिका थी, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसके हैं और उन्हें तैयार कराने या इस्तेमाल करने में किन लोगों की भूमिका रही।
जरूरत पड़ने पर पुलिस दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी करा सकती है। साथ ही वसीयत तैयार कराने वाले व्यक्ति, गवाहों और संबंधित संस्थानों से भी जानकारी ली जा सकती है।
परिवार की संपत्ति बनी रिश्तों में दरार की वजह
एक तरफ पिता की सैन्य सेवा और परिवार की विरासत है, तो दूसरी तरफ दोनों बहनों के बीच संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। बड़ी बेटी का कहना है कि माता-पिता ने वर्ष 2018 में संपत्ति का बराबर बंटवारा तय किया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर उस व्यवस्था को बदलने की कोशिश की गई।
मामला अदालत और पुलिस तक पहुंचने के बाद अब परिवार के इस विवाद का फैसला दस्तावेजों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगा।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी असली तस्वीर
एफआईआर दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है। छोटी बेटी पर लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस संबंधित धाराओं के तहत आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2018 की कथित वसीयत के बाद कौन से दस्तावेज तैयार हुए, माता-पिता की संपत्ति से जुड़ी रकम किसने निकाली और क्या वास्तव में दस्तावेजों में कोई फर्जीवाड़ा हुआ था? पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाशेगी।

