FCRA Amendment Bill: विदेशी चंदा नियमन संशोधन विधेयक JPC को भेजने पर घमासान, रिजिजू ने विपक्ष पर लगाया गुमराह करने का आरोप

FCRA Amendment Bill: नई दिल्ली, संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति और गहरी हो गई है। सरकार ने विवादित विदेशी चंदा (नियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill) को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा है, जबकि विपक्ष इस पर लगातार कड़ा विरोध जता रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में कहा कि सरकार बिना उचित कानूनी ढांचे के देश में विदेशी फंड आने की इजाजत नहीं दे सकती। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस विधेयक को लेकर जनता को गुमराह कर रहा है।

अखिलेश यादव का तीखा हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हम पूरा विपक्ष इस FCRA बिल के खिलाफ हैं जिसे सरकार ला रही है। माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं, बताइए, इस सरकार ने अब तक कौन सा ऐसा बिल लाया है जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं रहा हो?”

क्या है विवाद की जड़

25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और संस्थाओं के नियामक ढांचे को और सख्त बनाने का प्रयास करता है। यह विधेयक सरकार को यह अधिकार देता है कि वह एक “पदनामित प्राधिकरण” (Designated Authority) बनाए जो किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द होने, सरेंडर होने या नवीनीकरण न होने की स्थिति में विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों के प्रबंधन का जिम्मा संभाले। इसमें यह भी प्रावधान है कि अगर संपत्ति किसी पूजा स्थल से जुड़ी है, तो प्राधिकरण को उसकी धार्मिक प्रकृति बनाए रखनी होगी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK के साथ-साथ कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया सहित कई ईसाई संगठन और मिजोरम व नागालैंड के मुख्यमंत्री भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष के कई दल इस विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

सरकार की सफाई

सरकार का कहना है कि यह विधेयक धर्म-निरपेक्ष है और इसका मकसद मौजूदा FCRA ढांचे की खामियों को दूर करना है, न कि किसी खास समुदाय या संगठन को निशाना बनाना। गृह मंत्री अमित शाह ने मिजोरम के मुख्यमंत्री लालडुहोमा को आश्वासन दिया है कि संशोधित प्रावधान पूर्वप्रभावी (retrospective) रूप से लागू नहीं होंगे।

DMK से बातचीत जारी

सूत्रों के अनुसार, सरकार दिल्ली विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक जैसे लंबित एजेंडे पर समर्थन के लिए DMK से भी बातचीत कर रही है। DMK के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं, और उसका समर्थन सरकार को संविधान संशोधन विधेयकों के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा सकता है।

आगे क्या

मानसून सत्र शुक्रवार को समाप्त होना है, ऐसे में अगर विधेयक JPC को भेजा जाता है तो इस सत्र में इसकी पूरी विधायी प्रक्रिया पूरी होने की संभावना नहीं है। किसी भी औपचारिक प्रस्ताव को संसद में पेश और पारित किए जाने के बाद ही JPC को भेजना आधिकारिक माना जाएगा।

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