Minor raped in Noida: पुलिस पर तीन दिन तक केस दर्ज न करने का आरोप, ACP के हस्तक्षेप के बाद हुई कार्रवाई

Minor raped in Noida: नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां फेज-2 थाना क्षेत्र की रहने वाली 13 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बावजूद तीन दिनों तक न तो एफआईआर दर्ज की और न ही किशोरी का मेडिकल परीक्षण कराया।

घटना का ब्योरा

पीड़ित परिवार सेक्टर-93 इलाके में रहता है। किशोरी के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि पीड़िता खुद एक निजी स्कूल में पढ़ती है। परिजनों के अनुसार, किशोरी बदहवास हालत में रास्ते पर मिली थी। बाद में परिवार को जानकारी मिली कि वह किसी परिचित के घर गई थी, जहां उसके साथ दुष्कर्म की वारदात हुई।

तीन दिन तक कपड़े तक नहीं बदलने दिए गए

मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि मेडिकल जांच पूरी होने तक पीड़िता को कपड़े बदलने की भी अनुमति नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि किशोरी तीन दिनों तक घटना के समय पहने हुए कपड़ों में ही रही, क्योंकि पुलिस की ओर से मेडिकल के लिए भेजे जाने के बाद ही सरकारी अस्पताल में यह प्रक्रिया पूरी हो सकती थी।

चौकी से थाने और अस्पताल के लगाते रहे चक्कर

परिवार ने बताया कि केस दर्ज कराने के लिए वे किशोरी को लेकर लगातार चौकी, थाने और अस्पताल के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार शाम को जब वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया गया, तब जाकर पुलिस ने केस दर्ज करने के निर्देश दिए।

घटना के दिन ही दी गई थी सूचना

परिवार का दावा है कि उन्होंने घटना वाले दिन ही फेज-2 थाना पुलिस को सूचित कर दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि पुलिस ने तीन दिनों तक न तो एफआईआर दर्ज की और न ही मेडिकल प्रक्रिया शुरू कराई। इस देरी के चलते मंगलवार देर शाम तक किशोरी का मेडिकल परीक्षण भी नहीं हो सका था।

एसीपी का बयान

मामले में नोएडा की एसीपी दीक्षा सिंह ने कहा, “फेज-2 थाने में हुए मामले की जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलने के बाद केस दर्ज करने के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।”

अब आगे क्या

अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि इस देरी की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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