Noida Indoor Stadium: नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने सेक्टर-21ए स्थित इंडोर स्टेडियम के संचालन और रखरखाव के टेंडर में गंभीर अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण को मिली शिकायत के आधार पर दस्तावेजों की जांच कराने के बाद सीईओ ने टेंडर हासिल करने वाली सिक्योरिटी सॉल्यूशंस कंपनी को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि दस्तावेजों में लापरवाही या छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वर्ष 2021 में करीब 101 करोड़ रुपये की लागत से बने इस इंडोर स्टेडियम का संचालन और रखरखाव 15 साल के लिए सिक्योरिटी सॉल्यूशंस नाम की कंपनी को दिया गया था। हालिया जांच में पाया गया कि कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए कई फर्जी और भ्रामक दस्तावेज पेश किए थे। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर आर.पी. सिंह के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल प्रमुख है। आर.पी. सिंह ने कंपनी को ईमेल भेजकर अपना नाम वापस लेने का अनुरोध किया था और स्पष्ट किया है कि वर्ष 2022 से उनका इस कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
जांच में और भी कई गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना प्राधिकरण की अनुमति के स्टेडियम के जिम को तीसरी पार्टी को लीज पर दे दिया। इसके अलावा स्टेडियम बिना फायर एनओसी के संचालित किया जा रहा था, जिस पर फायर विभाग ने भी जवाब तलब किया है। अनुभव प्रमाणपत्रों में भी गड़बड़ी का आरोप लगा है। कंपनी ने नोएडा सेक्टर-93 स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट का अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया था, जिसे संबंधित अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने लिखित रूप से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि 2016 के बाद से कंपनी से कोई अनुबंध या संबंध नहीं रहा। कोचों की प्रोफाइल में भी आउटडोर खेलों के अनुभव को इंडोर के रूप में पेश करने के आरोप हैं, जिनके आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में अधिक अंक मिले थे।
सीईओ कृष्णा करुणेश ने मामले की जांच के बाद प्रथम दृष्टया टेंडर शर्तों के उल्लंघन को स्वीकार किया है। शिकायत मिलते ही उन्होंने दस्तावेजों की गहन जांच करवाई और अब कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार, नोटिस में कंपनी से इन आरोपों का जवाब मांगा जाएगा और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
इस मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से सामाजिक संगठनों और युवा संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। अविनाश सिंह समेत कई लोगों ने पूरे टेंडर रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाणपत्रों और तकनीकी मूल्यांकन की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की अपील की है। नोएडा प्राधिकरण के इस सख्त रुख से साफ है कि सीईओ कृष्णा करुणेश पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कोई समझौता नहीं करने वाले हैं। अब कंपनी का जवाब आने और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि टेंडर रद्द होगा या कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। फिलहाल पूरा मामला प्राधिकरण की निगरानी में है और स्टेडियम के संचालन को लेकर सख्ती बरती जा रही है।

