Noida Authority is anti-farmer: रोहिल्लापुर के किसानों का नोएडा प्राधिकरण पर गंभीर आरोप: पुरानी आबादी पर 5% प्लॉट काटकर साजिश, अदालती केस के बावजूद कार्रवाई

Noida Authority is anti-farmer: नोएडा, ग्राम रोहिल्लापुर, सेक्टर-132 के किसानों ने नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्राधिकरण ने उनकी पुरानी ग्रामीण आबादी वाली भूमि (खसरा नंबर 4) पर 5% आवासीय भूखंड काट दिए हैं, जो 2017 में 51 कमेटी (5(1) कमेटी) के माध्यम से विनियमित की गई थी। किसानों का कहना है कि यह कार्रवाई लिखित समझौते, अदालती प्रक्रिया और नियमों के विरुद्ध है।

करीब 15 दिन पहले इस प्लॉटिंग का पता चलने के बाद किसान तुरंत नोएडा प्राधिकरण पहुंचे। उन्होंने सीईओ, एसीईओ सतीश पाल और प्लानिंग विभाग की अधिकारियों से मुलाकात की। किसानों ने बताया कि अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि यदि यह 51 कमेटी वाली भूमि है तो प्लॉटों को 100% रद्द कर दिया जाएगा।

मुख्य मुद्दे:

प्रभावित परिवार: कुल करीब 12 परिवार, जिनमें से 2-3 परिवारों की भूमि पर सीधे 5 प्लॉट काटे गए। क्षेत्रफल: लगभग 1700-1800 वर्ग मीटर।
बाजार मूल्य: प्रति वर्ग मीटर करीब 2 लाख रुपये के आसपास, यानी कुल करोड़ों रुपये की भूमि। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि प्राधिकरण उनकी बात नहीं मानता तो वे सिविल के बजाय क्रिमिनल केस दर्ज कराएंगे। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से पूछा कि किन लोगों की रिपोर्ट पर प्लॉट काटे गए, लेकिन जवाब नहीं मिला। किसानों को बुलडोजर कार्रवाई का भी डर है, इसलिए उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

दस्तावेजी सबूत और इतिहास: किसानों ने 2003 में तत्कालीन सीईओ के.एम. पाण्डेय के आदेश, डीएम, राजस्व परिषद और एडीएम की रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिसमें इस भूमि को पुरानी आबादी माना गया था। 2016 में सड़क निर्माण के लिए लिखित समझौता हुआ था, जिसमें आबादी विनियमितीकरण का आश्वासन दिया गया। 5(1) कमेटी ने निरीक्षण के बाद आबादी को मान्यता दी और 2017 में विनियमितीकरण हुआ। वर्तमान में इस भूमि से संबंधित वाद जिला न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मुआवजा भी आज तक प्राप्त नहीं हुआ। किसानों ने उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, फाइल मूवमेंट और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

प्रेस विज्ञप्ति के प्रमुख अंश (अजीत सिंह तोमर, जगदीश सिंह, रमण, रविंदर व अन्य ग्रामवासियों द्वारा), प्राधिकरण साजिश रचकर मीडिया को गुमराह कर रहा है ताकि बड़े नामों को प्लॉट ट्रांसफर किए जा सकें। पुरानी आबादी पर 5% भूखंड लगाना नियमों के विरुद्ध है। IGRS शिकायत संख्या 60000230019052 का उल्लेख, जिसमें सीलिंग भूमि पर अदालती फैसले तक कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

नोएडा प्राधिकरण का पक्ष:
अभी तक प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। समान मामलों में प्राधिकरण अक्सर अवैध अतिक्रमण हटाने और नियमानुसार प्लॉटिंग का दावा करता है, लेकिन यहां किसान पुरानी आबादी और अदालती लंबितता का हवाला दे रहे हैं।

पृष्ठभूमि:
नोएडा क्षेत्र में किसानों की 5% आबादी भूखंडों की मांग और विनियमितीकरण के मुद्दे पुराने हैं। कई गांवों में सर्वे चल रहे हैं, लेकिन विवाद, देरी और आरोप आम हैं। किसान प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से न्याय की अपील कर रहे हैं। यह मामला नोएडा प्राधिकरण की पारदर्शिता और किसान हितों की रक्षा पर सवाल उठाता है। आगे की जांच और अदालती फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

यह भी पढ़ें: Noida fire tragedy: नोएडा सैक्टर-19 में मकान में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड ने समय रहते पाया काबू; बड़ा हादसा टला

यहां से शेयर करें