सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वांगचुक की सेहत की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी की जाए और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार जो भी जरूरी उपचार हो, वह तुरंत उपलब्ध कराया जाए। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए कहा, “हर व्यक्ति का जीवन अनमोल है और सरकार को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।” सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वांगचुक की सेहत की जांच पहले से ही सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम द्वारा नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर जो भी दवा या चिकित्सा सहायता जरूरी होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि इस व्यक्ति की सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित जांच हो और डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप किया जाए। हर जीवन अनमोल है।” केंद्र के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
क्या है पूरा मामला
68 वर्षीय शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका यह विरोध युवाओं के नेतृत्व वाले “कॉकरोच जनता पार्टी” आंदोलन के समर्थन में है। प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का 18वां दिन था और लगातार बढ़ती चिंताओं के बीच रिपोर्टों के मुताबिक वांगचुक का वजन 8 किलोग्राम से ज्यादा घट चुका है और उनका ब्लड शुगर स्तर भी लगातार गिर रहा है।
अदालत में क्यों पहुंचा मामला
वकील राकेश कुमार सैनी ने यह जनहित याचिका दाखिल कर केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों से वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने और आवश्यक चिकित्सा उपचार, जिसमें जरूरत पड़ने पर जबरन आहार देना भी शामिल है, उपलब्ध कराने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि विरोध और भूख हड़ताल करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राज्य का भी यह संवैधानिक दायित्व है कि वह नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करे। सुनवाई की शुरुआत में जब केंद्र सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ था, तब मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि अदालत मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई करेगी और केंद्र से निर्देश लेने को कहेगी।
नागरिक समाज ने भी की अपील
भूख हड़ताल लंबा खिंचने के बीच 1,800 से अधिक नागरिक समाज के सदस्यों ने वांगचुक से अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने बताया कि 17 दिन की भूख हड़ताल के बाद वांगचुक की मांसपेशियों में कमजोरी और गंभीर शारीरिक पीड़ा शुरू हो गई थी, जिसके चलते उन्होंने व्यक्तिगत रूप से वांगचुक से हड़ताल खत्म करने का अनुरोध किया।
आगे क्या
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र के आश्वासन को दर्ज करते हुए याचिका का निपटारा तो कर दिया है, लेकिन कोर्ट के निर्देश के मुताबिक अब सरकारी डॉक्टरों को हर दिन वांगचुक की सेहत का आकलन करना होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता देनी होगी। इस बीच सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत शुरू करने को लेकर अब तक कोई स्पष्ट पहल सामने नहीं आई है, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

