देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल नोएडा में अवैध निर्माण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के कई गांवों और प्राधिकरण की अधिसूचित भूमि पर बहुमंजिला इमारतें, पीजी, किराये के फ्लैट और व्यावसायिक भवन तेजी से खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य खुलेआम चल रहा होता है, तब संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं होती और कार्रवाई केवल नोटिस चस्पा करने तक ही सीमित क्यों दिखाई देती है। महर्षि आश्रम की जमीन पर लगातार फ्लैट का निर्माण किया जा रहा है। सीधे सीधे प्राधिकरण के नियमों को धाता बताया जा रहा है। सबसे बड़ा मामला लैंडयूज बदलने का है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण की ओर से समय-समय पर अवैध निर्माणों पर नोटिस लगाए जाते हैं और रिकॉर्ड में कार्रवाई भी दर्ज होती है, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहता है। कई मामलों में नोटिस लगने के बाद भी भवन निर्माण पूरा हो जाता है और बाद में उनमें लोग रहने या व्यवसाय शुरू कर देते हैं।
महर्षि आश्रम क्षेत्र में भी बढ़ रहा अवैध निर्माण
स्थानीय स्तर पर लगातार यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि महर्षि आश्रम से जुड़े क्षेत्रों में भी अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं। आश्रम की जमीन पर फ्लैट बनाए जा रहे है। आरोप है कि अधिसूचित और प्राधिकरण के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य जारी रहता है, जबकि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी होती हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह शहरी नियोजन और भूमि प्रबंधन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यहां करीब 20 से 25 हजार फ्लैट बन चुके है।
कागजों में कार्रवाई, जमीन पर निर्माण जारी
अक्सर देखने में आता है कि प्राधिकरण द्वारा नोटिस जारी करने, ध्वस्तीकरण की चेतावनी देने या कार्रवाई की प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के बाद भी निर्माण कार्य रुकता नहीं है। कई स्थानों पर भवन पूरी तरह तैयार होकर आबाद भी हो जाते हैं। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या निगरानी व्यवस्था प्रभावी है या फिर कार्रवाई केवल रिकॉर्ड तक सीमित रह जाती है।
सबसे ज्यादा जोखिम आम लोगों पर
अवैध निर्माण का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। कई लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर ऐसे फ्लैट खरीद लेते हैं या किराये पर रहने लगते हैं, जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती। यदि भविष्य में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है या किसी प्रकार का हादसा होता है, तो सबसे अधिक नुकसान इन्हीं लोगों को झेलना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्वीकृत निर्माणों में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकासी, संरचनात्मक मजबूती और बिजली व्यवस्था जैसे मानकों की अनदेखी होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे भवन किसी भी दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा बन सकते हैं।
हादसे के बाद जागने की प्रवृत्ति पर सवाल
शहर में पहले भी आग, भवन गिरने और अन्य हादसों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज होती रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अवैध निर्माणों की नियमित निगरानी और समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाए, तो कई संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उनका मानना है कि केवल हादसे के बाद अभियान चलाने के बजाय निर्माण के शुरुआती चरण में ही नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।
पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का सुझाव है कि नोएडा प्राधिकरण को अवैध निर्माणों की शिकायतों, जारी नोटिसों और वास्तविक कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही ड्रोन सर्वे, नियमित निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई से अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

