नोएडा के गांवों में पीजी और किराये के कमरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल, ममूरा हादसे ने खोली अव्यवस्थित निर्माण की पोल

नोएडा। सेक्टर-66 स्थित ममूरा गांव में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद नोएडा के गांवों में बने पीजी (Paying Guest), किराये के फ्लैट और कमरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 100 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। शुरुआती जांच में आग की वजह इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिंग के दौरान हुई स्पार्किंग मानी जा रही है। घटना के बाद भवन स्वामी और लीजधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है।

नोएडा के ममूरा, छिजारसी, बहलोलपुर, बिशनपुरा, रसूलपुर नवादा, नगला वाजिदपुर, सलारपुर, बरौला, हाजीपुर, भंगेल, सोरखा और अन्य शहरी गांवों में हजारों की संख्या में बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र, निजी कंपनियों के कर्मचारी और दूसरे राज्यों से आए कामकाजी लोग किराये पर रहते हैं। अधिकांश इमारतों में एक ही भवन के भीतर दर्जनों कमरे या छोटे फ्लैट बनाकर पीजी के रूप में संचालित किए जा रहे हैं।

सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश इमारतों में अग्निशमन उपकरण या तो लगे ही नहीं हैं या फिर केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं। कई भवनों में इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, सुरक्षित विद्युत वायरिंग और निकासी मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। संकरी गलियों के कारण अग्निशमन वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी कठिनाई होती है, जिससे राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होता है। ममूरा हादसे में भी दमकल कर्मियों को संकरी गलियों और अनियोजित निर्माण के कारण बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।

तेजी से बढ़े पीजी, लेकिन निगरानी का अभाव

नोएडा के शहरी गांवों में पिछले कुछ वर्षों में पीजी और किराये के कमरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार शहर में हजारों पीजी संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनका कोई समग्र डाटा, लाइसेंसिंग व्यवस्था या नियमित सुरक्षा ऑडिट नहीं है। कई क्षेत्रों में एक-एक गली में दर्जनों पीजी संचालित होने की बात सामने आती रही है।

सिर्फ आग नहीं, कानून-व्यवस्था भी चिंता का विषय

सुरक्षा का मुद्दा केवल अग्निकांड तक सीमित नहीं है। बीते महीनों में ममूरा के एक पीजी में नाबालिग छात्र के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया था, जिसने पीजी में रहने वालों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।

विशेषज्ञों की राय

शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों की आबादी वाले क्षेत्रों में अनियोजित बहुमंजिला निर्माण और स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था के अभाव ने जोखिम बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि भवन चाहे किसी भी क्षेत्र में हो, सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। केवल कागजी अनुमति या प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है।

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

ममूरा हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नोएडा के गांवों में चल रहे हजारों पीजी और किराये के फ्लैट वास्तव में रहने योग्य और सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और पुलिस को संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए। जिन इमारतों में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकासी, विद्युत सुरक्षा और भवन मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ममूरा की घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अनियोजित निर्माण के बीच सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है। यदि समय रहते व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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