नौ साल की उम्र में पायथन सीखा, 11 साल में बनाया पहला AI प्रोडक्ट, अब कनाडा, भारत और कंबोडिया में कंपनियों को दे रही सेवाएं
AI स्टार्टअप Voxa: कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के केलोना शहर में रहने वाली 12 साल की मना जम्पाला इन दिनों सुर्खियों में हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली यह छात्रा स्कूल, खेलकूद और दोस्तों के साथ समय बिताने के अलावा एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप भी चला रही है, जिसकी सेवाएं तीन देशों कनाडा, भारत और कंबोडिया में इस्तेमाल हो रही हैं, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने वाली सबसे युवा AI उद्यमियों में से एक बन गई हैं।
Voxa नाम से बनाई कंपनी
मना ने अपनी कंपनी का नाम Voxa रखा है, जो एक AI-पावर्ड वर्चुअल रिसेप्शनिस्ट है। मना ने नवंबर 2025 में Voxa लॉन्च किया, जब उन्होंने देखा कि उनके पिता की छोटी टीम रोजमर्रा का काम संभालते हुए अक्सर आने वाली कॉल्स का जवाब नहीं दे पाती थी। उन्होंने बिजनेस इनसाइडर को बताया कि इसी अनुभव ने उन्हें ऐसा टूल बनाने के लिए प्रेरित किया जो हर समय कॉल का जवाब दे सके। मना ने बताया कि 11 साल की उम्र में अपने पिता के कार्यस्थल पर जाने के दौरान उन्होंने पहली बार यह समस्या देखी थी। स्टाफ व्यस्त होने के कारण कई कॉल्स का जवाब नहीं मिल पाता था, जिसके बाद उन्होंने इसका तकनीकी समाधान खोजना शुरू किया। Voxa को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह चौबीसों घंटे कॉल का जवाब दे सके, अपॉइंटमेंट बुक कर सके, रेस्टोरेंट के ऑर्डर ले सके और हर बातचीत के बाद उसका सारांश तैयार कर सके।
नौ साल की उम्र से शुरू हुआ सफर
मना की टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी बचपन से ही रही है। उन्होंने पहले Scratch कोडिंग कैंप से प्रोग्रामिंग सीखी, इसके बाद नौ साल की उम्र में पायथन सीखी। 11 साल की उम्र तक वह अपने खुद के AI-आधारित प्रोडक्ट बनाने लगी थीं। उनकी मेहनत का असर स्कूल की चारदीवारी से बाहर भी दिखा। भारत यात्रा के दौरान उन्हें एक कॉलेज-स्तरीय विज्ञान प्रतियोगिता में विशेष पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा उन्हें युवा उद्यमियों की मदद करने वाले 1517 Medici Project से एक ग्रांट भी मिली।
खुद कोड करना सीखा, AI टूल्स की मदद से
मना ने बताया कि उन्होंने Voxa को बनाने के लिए AI कोडिंग टूल्स से कोड के छोटे-छोटे हिस्से जेनरेट करवाए, जिन्हें वह खुद टेस्ट करके धीरे-धीरे सुधारती गईं। शुरुआत में उन्होंने थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में उन्होंने खुद का बैकएंड सिस्टम तैयार किया।
उम्र को लेकर सवाल, लेकिन ऑनलाइन मिली पहचान
दिलचस्प बात यह है कि जब मना खुद बिजनेस से मिलने जाती थीं, तो अक्सर उनकी उम्र और यह सवाल उठता था कि क्या इसमें कोई अभिभावक शामिल है। वहीं ऑनलाइन बातचीत में लोगों का ध्यान इस बात पर ज्यादा रहा कि प्रोडक्ट किसने बनाया, न कि उम्र पर। मना ने यह भी बताया कि वह ऐसे कई 13 साल के बच्चों से मिली हैं जो कोडिंग जानते हैं और खुद स्टार्टअप चला रहे हैं, और उन्होंने अन्य युवा फाउंडर्स को भी ऐसे ऑनलाइन कम्युनिटी से जुड़ने की सलाह दी।
आगे की योजना
मना अपनी कंपनी का विस्तार जारी रखना चाहती हैं, किसी बड़े स्टार्टअप एक्सेलेरेटर में दाखिला लेना चाहती हैं और आगे चलकर बिजनेस को और बड़ा बनाना चाहती हैं। मना जम्पाला की कहानी बताती है कि आज की पीढ़ी पहले से कहीं ज्यादा कम उम्र में AI की दुनिया में कदम रख रही है और तकनीक अब सिर्फ बड़ों का क्षेत्र नहीं रह गई है।

