सपा के संस्थापक एंव पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण से लेकर चैधरी चरण सिंह तक के साथ काम करने वाले मुलायम सिंह यादव ने यूपी की राजनीतिक जमीन को समाजवाद के लिए उर्वर बनाया था। जवानी के दिनों में अखाड़े में पहलवानी करने वाले मुलायम सिंह यादव सियासत में भी अपने चरखा दांव के लिए मशहूर थे। तीन बार यूपी के सीएम रहे मुलायम सिंह यादव के सियासी जीवन में उतार-चढ़ाव जरूर आए, लेकिन वह अपने समर्थकों के लिए हमेशा नेताजी के रूप में उबर कर सामने आए तथा आखिरी तब बने रहे।

10 बार विधायक और 7 बार रहे सांसद
मुलायम सिंह यादव 10 बार विधायक बन कर सदन में गए और 7 बार सांसद बनकर संसद पहुंचेे। वह 1996 से 1998 के दौरान देश के रक्षा मंत्री रहे थे और तीन बार यूपी के सीएम भी बने। मुलायम सिंह यादव ने 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था। यही नहीं एक दौर में तो वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी बने थे। दशकों तक वह राष्ट्रीय नेता रहे, लेकिन उनकी सियासत का मुख्य अखाड़ा उत्तर प्रदेश ही था। किशोरावस्था से ही राम मनोहर लोहिया से प्रभावित थे। भले ही 2017 में वह सपा में बैकसीट पर गए और अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन मुलायम सिंह यादव ही सपा कार्यकर्ताओं के लिए नेताजी रहे। सपाईयों के बीच हमेशा नेता जी की कमी खलेगी क्योकि हर संकट के मोर्च पर वे अपनी समझदारी का परिचय देने में माहिर थे।
नेताजी को राजनीति में हमेशा संभावनाएं बनाए रखने के लिए जाना जता था। कई दलों के विलय और विघटन से उपजे मुलायम सिंह यादव को चैधरी चरण सिंह के साथ भी काम करने का अनुभव था। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले मुलायम सिंह यादव 1967 में विधायक बने थे। शुरुआती दौर में लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी में रहे और फिर चैधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल के साथ भी ह रहे। यही नहीं इसके बाद भारतीय लोकदल में रहे और फिर समाजवादी जनता पार्टी का हिस्सा रहे। अंत में 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी का गठन किया।

