बिहार के बक्सर जिले में इटाढ़ी रेलवे गुमटी (बक्सर-बरूणा रेलवे स्टेशन यार्ड) पर 26 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) उद्घाटन के महज चार दिन (96 घंटे) बाद क्षतिग्रस्त हो गया। पाया नंबर 5 पर स्लैब के धंस जाने से सड़क पर एक फुट से अधिक गैप बन गया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल यातायात बंद कर दिया और क्षतिग्रस्त हिस्से को लोहे की प्लेटों से ढक दिया। यह घटना स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश का कारण बन गई है। 11 वर्षों के लंबे इंतजार और चार बार शिलान्यास के बाद बने इस पुल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं। कई लोग इसे बिहार में लगातार हो रही पुल संबंधी घटनाओं की कड़ी मानते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
परियोजना की पृष्ठभूमि
यह आरओबी बक्सर को इटाढ़ी और धनसोई क्षेत्र से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए बनाया गया था। लगभग 950 मीटर लंबे इस पुल का उद्देश्य रेलवे लाइन पार करने वाले लेवल क्रॉसिंग (संख्या 70) पर होने वाली भीड़ और दुर्घटनाओं को कम करना था। 31 मई को इसे आम जनता के लिए खोला गया था, लेकिन 4-5 जून की सुबह पिलर-5 के पास स्लैब धंस गया। कुछ रिपोर्टों में पाया नंबर 11 का भी जिक्र है, लेकिन अधिकांश स्रोत पिलर-5 की पुष्टि करते हैं।आरओबी के निर्माण में रेलवे और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की संयुक्त भूमिका रही। पुल के केयरटेकर मुन्ना कुमार ने ओवरलोडेड ट्रक को जिम्मेदार ठहराया और भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया। हालांकि, स्थानीय लोग इस दावे को मानने को तैयार नहीं हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कार्रवाई
ठेकेदार पर FIR: घटना के बाद ठेकेदार प्रमोद कुमार सिंह के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। बक्सर विधायक आनंद मिश्रा ने इसे “घोर प्रशासनिक लापरवाही” बताया और डीएम सहीला को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने 3 जून को ही पुल की ग्रेडिएंट और सुरक्षा संबंधी चेतावनी दी थी। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर समयबद्ध जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पुराने इटाढ़ी लेवल क्रॉसिंग को फिर से खोलने का भी सुझाव दिया। जिला प्रशासन ने NHAI को मरम्मत का जिम्मा सौंपा है। भारी वाहनों पर प्रतिबंध जारी है, जबकि हल्के वाहनों और दोपहिया वाहनों को पर्यवेक्षण में अनुमति दी जा रही है।
जनता की पीड़ा
लोगों का कहना है कि वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिला पुल कुछ दिनों में ही टूट गया। यातायात बंद होने से दैनिक आवागमन और व्यापार प्रभावित हो रहा है। कुछ इलाकों में वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन असुविधा बनी हुई है। बिहार में हाल के वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज उपाध्याय और अन्य स्थानीय नेताओं ने स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मरम्मत शीघ्र पूरी की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, जनता अब विश्वसनीय और टिकाऊ निर्माण की मांग कर रही है, ताकि विकास के नाम पर जनधन की बर्बादी न हो। यह घटना बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

