पाकिस्तान में हिंदू-सिख विरासत का दमन और ड्रग तस्करी, लाहौर नाम बहाली पर उग्रवादियों का विरोध

पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरता एक बार फिर से अपनी सच्चाई उजागर कर रही है। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के नेतृत्व वाली सरकार ने लाहौर के प्री-पार्टिशन हिंदू, सिख और जैन युग के नामों को बहाल करने का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन उग्रवादियों और सोशल मीडिया व्लॉगर्स के भारी विरोध के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। ठीक उसी समय, गुजरात तट पर पाकिस्तान से जुड़े एक जहाज से 100 किलोग्राम से अधिक कोकीन जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। दोनों घटनाएं पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और भारत के प्रति उसके दुश्मनाना रवैये को रेखांकित करती हैं।

लाहौर में नाम बहाली पर विवाद

मार्च 2026 में पंजाब कैबिनेट की बैठक में मरियम नवाज और उनके पिता नवाज शरीफ के नेतृत्व में लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट के तहत कई जगहों के नाम बदलने का फैसला लिया गया था। इसमें शामिल थे:

इस्लामपुरा → कृष्ण नगर

सुन्नत नगर → संत नगर

मुस्तफाबाद → धर्मपुरा

बाबरी मस्जिद चौक → जैन मंदिर रोड

रहमान गली → राम गली

और अन्य ब्रिटिश व पूर्व-पार्टिशन नाम जैसे ब्रैंड्रेथ रोड, क्वींस रोड आदि। यह कदम लाहौर की बहुसांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत करने के उद्देश्य से उठाया गया था, जहां 1947 से पहले हिंदू, सिख और जैन समुदायों की बड़ी आबादी रहती थी। हालांकि, फैसले के कुछ दिनों बाद ही कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और सोशल मीडिया पर भारी आलोचना शुरू हो गई। उग्रवादियों ने इसे “हिंदू संस्कृति का प्रचार” बताते हुए सरकार पर दबाव बनाया। नतीजतन, सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा और प्रस्ताव को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया।  विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना पाकिस्तान में धार्मिक सहिष्णुता की कमी और इतिहास से इनकार की मानसिकता को दर्शाती है। दशकों से पाकिस्तान ने विभाजन पूर्व की साझा विरासत को मिटाने की कोशिश की है, लेकिन अब खुद उसके कुछ नेता भी इस सच्चाई को स्वीकार करने से डर रहे हैं।

गुजरात में ड्रग्स की बड़ी जब्ती

इसी बीच, भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की ओर से आने वाली ड्रग तस्करी की एक बड़ी कड़ी को तोड़ा है। 25-26 मई की रात गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की संयुक्त टीम ने मुंद्रा पोर्ट के पास कच्छ तट पर एक यूरोपीय जहाज को रोका।  जहाज पाकिस्तान के पोर्ट कासिम से आया था। इसमें 115-118 किलोग्राम कोकीन बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1000 से 1150 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि आगे की जांच चल रही है। अधिकारी इसे लैटिन अमेरिका से कराची होते हुए भारत भेजे जा रहे ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा मान रहे हैं।  गुजरात डीजीपी केएलएन राव ने इसे बड़ी सफलता बताया। यह पिछले पांच वर्षों में ऐसी 15वीं संयुक्त कार्रवाई है।

दोनों घटनाओं का संदर्भ

ये दोनों घटनाएं एक ही समय में उभरकर पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को उजागर करती हैं। एक तरफ जहां देश अपनी ऐतिहासिक जड़ों को स्वीकार करने से कतराता है और कट्टरवाद के आगे झुक जाता है, वहीं दूसरी तरफ उसकी सरजमीं से भारत में ड्रग्स और अन्य अवैध गतिविधियों का निर्यात जारी है। भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता ने एक बड़ी आपदा को टाला है, जबकि पाकिस्तान में मरियम नवाज सरकार की मजबूरी साबित करती है कि वहां उग्रवादी ताकतें अभी भी लोकतांत्रिक फैसलों पर हावी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी सीमाओं पर निगरानी और सख्ती बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि पड़ोसी देश की अंदरूनी कमजोरियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं।

यह भी पढ़ें: केरल में ED छापों पर उग्र विरोध, CPI(M) कार्यकर्ताओं ने ED टीम की कार के शीशे तोड़े, मचा बवाल

यहां से शेयर करें