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भूमाफियाओं ने छुट्टी की आड़ में की चारदीवारी, प्राधिकरण ने चलाया बुलडोजर — हाजीपुर में कब्जे की साजिश नाकाम – जय हिन्द जनाब भूमाफियाओं ने छुट्टी की आड़ में की चारदीवारी, प्राधिकरण ने चलाया बुलडोजर — हाजीपुर में कब्जे की साजिश नाकाम – जय हिन्द जनाब

भूमाफियाओं ने छुट्टी की आड़ में की चारदीवारी, प्राधिकरण ने चलाया बुलडोजर — हाजीपुर में कब्जे की साजिश नाकाम

नोएडा। शनिवार-रविवार की छुट्टी को ढाल बनाकर प्राधिकरण की जमीन हड़पने की एक बड़ी साजिश शुक्रवार की देर रात नोएडा के गांव हाजीपुर, सेक्टर-104 में उस वक्त बेनकाब हो गई, जब स्थानीय लोगों की सतर्कता और प्राधिकरण अफसरों की त्वरित कार्रवाई ने भूमाफियाओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया। देर रात चारदीवारी खड़ी करते पकड़े गए माफिया मौके से फरार हो गए, लेकिन प्राधिकरण की टीम ने पहुंचते ही बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

छुट्टी का फायदा उठाने की थी चाल — शुक्रवार रात चुनी गई टाइमिंग

भूमाफियाओं की रणनीति बिल्कुल सोची-समझी थी। शुक्रवार की देर रात जब शहर सो रहा था, तब हाजीपुर गांव में प्राधिकरण की जमीन पर चारदीवारी का काम शुरू कर दिया गया। माफियाओं का हिसाब साफ था — शनिवार और रविवार को सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं, इसलिए दो दिन में दीवार खड़ी कर लो और सोमवार तक कब्जा पक्का। यह पहली बार नहीं है जब भूमाफियाओं ने इस तरकीब का इस्तेमाल किया हो — त्योहारों, लंबे वीकएंड और सार्वजनिक अवकाशों पर कब्जे की यह रणनीति नोएडा में पहले भी आजमाई जाती रही है।

स्थानीय लोगों की सूझबूझ से टला बड़ा नुकसान

जब देर रात हाजीपुर में मशीनों और मजदूरों की आवाजाही शुरू हुई तो स्थानीय लोगों की नजर इस संदिग्ध गतिविधि पर पड़ी। उन्होंने तुरंत प्राधिकरण के अफसरों को सूचित किया। इस सूचना को प्राधिकरण ने गंभीरता से लिया और बिना देर किए वर्क सर्किल प्रभारी रोहित सिंह के नेतृत्व में अफसरों की टीम को मौके पर रवाना किया।

टीम के पहुंचते ही दीवार बना रहे माफिया और उनके गुर्गे अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से रफूचक्कर हो गए। इसके बाद प्राधिकरण की टीम ने बिना एक पल गंवाए बुलडोजर चलाकर खड़ी की जा रही चारदीवारी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

एफआईआर की तैयारी, लेकिन असली सवाल अभी बाकी है

प्राधिकरण अफसरों ने दावा किया है कि इस मामले में जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब तक माफिया पकड़े नहीं जाते और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक महज एफआईआर से कितना फर्क पड़ेगा?

हाजीपुर में एक नहीं, कई जगह है कब्जा — पुरानी सांठगांठ पर सवाल

यह घटना कोई अकेली नहीं है। गांव हाजीपुर में प्राधिकरण की जमीन पर कई स्थानों पर भूमाफियाओं ने पहले से कब्जा कर रखा है। यह कब्जे रातोंरात नहीं हुए — इनके पीछे एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें स्थानीय स्तर पर सांठगांठ की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जानकारों के मुताबिक वर्क सर्किल स्तर पर मिलीभगत के चलते भूमाफिया अपने मंसूबों में कामयाब होते रहे हैं। जब तक भीतर से ‘हरी झंडी’ न मिले, तब तक इतनी बड़ी-बड़ी जमीनों पर इस तरह खुलेआम कब्जा होना आसान नहीं होता। शुक्रवार की रात जो हुआ, वह तो स्थानीय लोगों की सजगता से रुक गया — लेकिन जो पहले से हो चुका है, उसका क्या?

प्राधिकरण की जमीन पर कब्जे का पैटर्न — एक बड़ी समस्या

नोएडा में यह समस्या सिर्फ हाजीपुर तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण की अधिग्रहीत जमीनों पर कब्जे का एक पूरा तंत्र काम करता है जिसमें शामिल होते हैं:

  • स्थानीय भूमाफिया, जो जमीन की पहचान कर कब्जे की योजना बनाते हैं
  • बिचौलिए, जो प्रशासनिक तंत्र से संपर्क साधते हैं
  • छोटे बिल्डर, जो कब्जाई गई जमीन पर निर्माण कर फ्लैट बेचते हैं
  • कुछ अफसर, जो जानकारी होने पर भी आंखें मूंद लेते हैं

छुट्टियों और देर रात की आड़ में कब्जे की यह रणनीति इसीलिए काम करती रही है क्योंकि जब तक कोई देखने वाला न हो, तब तक दीवार खड़ी हो जाती है और बाद में उसे हटाना कानूनी और प्रशासनिक पचड़े का काम बन जाता है।

अब आगे क्या होना चाहिए?

शुक्रवार की रात की कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन यह काफी नहीं है। जरूरत इन कदमों की है:

  • भागे हुए माफियाओं की शीघ्र गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई
  • हाजीपुर में पहले से हुए सभी अवैध कब्जों का सर्वे और उन्हें हटाने की मुहिम
  • वर्क सर्किल स्तर की सांठगांठ की जांच, ताकि भीतरी मदद करने वालों को बेनकाब किया जा सके
  • प्राधिकरण की संवेदनशील जमीनों पर नियमित गश्त और निगरानी तंत्र
  • अवैध निर्माण में शामिल बिल्डरों पर भी कार्रवाई, न सिर्फ कब्जाधारियों पर

हाजीपुर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि नोएडा में भूमाफियाओं का नेटवर्क कितना संगठित है और वे किस तरह सरकारी तंत्र की खामियों का फायदा उठाते हैं। स्थानीय नागरिकों की सतर्कता इस बार काम आई — लेकिन यह जिम्मेदारी केवल आम लोगों पर नहीं छोड़ी जा सकती। प्राधिकरण को अपनी जमीनों की रक्षा के लिए एक स्थायी और पारदर्शी तंत्र खड़ा करना होगा।

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