केरल में सीएम पर सस्पेंस, यूपीडीएफ की ऐतिहासिक जीत के बाद सीएम चयन पर सस्पेंस, विधायकों की बैठक जारी

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूपीडीएफ) की 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर भारी जीत के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक पीसीसी कार्यालय पहुंचे हैं, जहां विधान मंडल दल (सीएलपी) की बैठक हो रही है, लेकिन अगले मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बरकरार है।

नेताओं की बैठक और पर्यवेक्षकों की भूमिका

वरिष्ठ नेता वी डी सतीशेन, कोडिकुन्निल सुरेश और दीपदास मुनशी तिरुवनंतपुरम के एक होटल में एआईसीसी पर्यवेक्षकों अजय माकेन और मुकुल वास्निक से मिले। कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा कि पर्यवेक्षक विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से परामर्श कर हाईकमान को सीएलपी नेता पर रिपोर्ट सौंपेंगे। सुबह 10:30 बजे शुरू हुई सीएलपी बैठक में 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों की राय ली जा रही है।

सीएम पद की दौड़ में प्रमुख दावेदार

मुख्यमंत्री पद की रेस में विपक्ष के नेता वी डी सतीशेन, पूर्व मंत्री रमेश चेन्निथला और अलप्पुझा सांसद केसी वेणुगोपाल प्रमुख दावेदार हैं। बहुमत विधायक वेणुगोपाल के पक्ष में हैं, लेकिन चेन्निथला ने वरिष्ठता पर जोर दिया है। हाईकमान दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ चर्चा कर चुका है। यूपीडीएफ सहयोगियों से भी परामर्श होगा।

सहयोगी दलों की मांगें

केरल कांग्रेस (जोसेफ) प्रमुख पी जे जोसेफ ने नई सरकार में अपनी पार्टी के लिए कम से कम दो मंत्रिमंडल जिम्मेदारियां मांगी हैं। यूपीडीएफ में आईयूएमएल ने 22 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस को 63 मिलीं। एलडीएफ को महज 35 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने नेमम, कझकोट्टम और चाथन्नूर में पहली बार जीत हासिल की।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे “यूपीडीएफ सुनामी” करार दिया और कहा, “केरलम ने जीत हासिल की।” पूर्व मंत्री वी शिव ने यूपीडीएफ में आंतरिक कलह का जिक्र किया। सतीशेन ने हाईकमान पर फैसला छोड़ा, जबकि चेन्निथला ने गैर-विधायक को सीएम बनाने का विरोध किया। पर्यवेक्षक रिपोर्ट के बाद हाईकमान अंतिम निर्णय लेगा।

जनता की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया

यूपीडीएफ की भारी जीत पर राज्यभर में जश्न का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग एलडीएफ के दस साल के शासन के खिलाफ जनाक्रोश को जीत का कारण बता रहे हैं। कई नागरिकों ने कहा कि विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर यूपीडीएफ की वैकल्पिक नीतियां आकर्षित करने वाली रहीं। थिरुवनंतपुरम में पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटी गईं। विपक्षी नेता इसे “पीढ़ीगत बदलाव” बता रहे हैं, जहां युवा मतदाताओं ने कांग्रेस को समर्थन दिया।

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